छपरा/पटना। भोजपुरी अभिनेता और आरजेडी के पूर्व प्रत्याशी खेसारी लाल यादव ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में छपरा सीट से मिली हार के बाद राजनीति से दूरी बनाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति उनके लिए सही मंच नहीं है, क्योंकि यहां सच बोलना सबसे बड़ी समस्या है।
खेसारी ने हार के कारणों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हार की वजह सभी जानते हैं।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हार का कारण पूरे बिहार को पता है। बिहार की जनता को अगर बदलाव नहीं चाहिए, बेहतर कुछ नहीं चाहिए, तो इसके लिए किसी एक नेता या पार्टी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।”
“राजनीति में झूठ जरूरी हो गया है”
खेसारी लाल यादव ने साफ शब्दों में कहा कि वह एक कलाकार के रूप में ज्यादा सहज हैं।
उनका कहना था,
“हम लोगों के लिए राजनीति ठीक नहीं है। यहां जो सच बोलेगा, वह बहुत आगे तक नहीं जा सकता। अगर आपको झूठे वादे करना आता है, लोगों को बहलाना आता है, तभी आप राजनीति में टिक सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि बिहार की जनता को खुद यह सोचना होगा कि उनके और उनके बच्चों के भविष्य के लिए कौन बेहतर सोच सकता है।
पवन सिंह पर तंज, बीजेपी से सवाल
भोजपुरी अभिनेता और बीजेपी नेता पवन सिंह के जन्मदिन पर कथित तौर पर नशे की हालत में एक लड़की के साथ केक काटने के वीडियो को लेकर खेसारी ने तीखा तंज कसा।
उन्होंने कहा,
“यह उनका जीने का तरीका है। आप देखिए, वो महिलाओं का सम्मान करते हैं या नहीं। इसके बावजूद बीजेपी उन्हें सुरक्षा देकर बैठी है। यह उनकी पार्टी का विषय है, उनकी जिंदगी है। मैं अपने हिसाब से जीता हूं, मुझे पता है कौन क्या है।”
दिनेश लाल यादव के बयान पर पलटवार
बीजेपी नेता और अभिनेता दिनेश लाल यादव (निरहुआ) के बयान ‘खेसारी लाल बीजेपी के लायक नहीं हैं’ पर भी खेसारी ने प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा,
“मैं बीजेपी के लायक हूं या नहीं, यह दिनेश लाल यादव तय नहीं कर सकते। वह पार्टी के अध्यक्ष नहीं हैं। उन्हें यह भी नहीं पता होगा कि खेसारी लाल यादव को बीजेपी से कितने ऑफर आए होंगे।”
खेसारी ने दोहराया कि सच बोलने वाले लोग राजनीति में सफल नहीं हो सकते।
लालू यादव पर आरोप तय होने पर प्रतिक्रिया
लैंड फॉर जॉब केस में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ आरोप तय होने पर खेसारी ने कहा कि इस उम्र में इस तरह की कानूनी लड़ाई लड़ना दुखद है।
उन्होंने कहा,
“मुझे लगता है कि उन्हें जरूर लड़ना चाहिए। जिस उम्र से वो गुजर रहे हैं, उस उम्र में ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिए। जहां तक सवाल है कि उन्होंने बिहार को क्या दिया, तो गांव जाकर लोगों से पूछिए।”
उन्होंने यह भी जोड़ा,
“अगर आपके पास सत्ता है, तो वैध चीज भी अवैध साबित की जा सकती है। और अगर सत्ता नहीं है, तो हर चीज पर सवाल खड़े किए जा सकते हैं।”
राजनीति से दूरी के संकेत
खेसारी लाल यादव के इस बयान को राजनीतिक गलियारों में राजनीति से दूरी बनाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हार के बाद उनके तीखे और बेबाक बयान यह साफ करते हैं कि वे फिलहाल खुद को राजनीति की बजाय कला और सामाजिक भूमिका में ज्यादा सहज महसूस कर रहे हैं।



