नई दिल्ली। भारत की अगली जनगणना को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब खत्म होने वाला है। केंद्र सरकार ने जनगणना की तारीखों का औपचारिक ऐलान कर दिया है। यह जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होगी, क्योंकि यह पूरी तरह डिजिटल होगी और आजादी के बाद पहली बार जातिगत आंकड़े भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज किए जाएंगे।
हर 10 साल में होने वाली जनगणना 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अब यह जनगणना दो चरणों में कराई जाएगी।
दो चरणों में होगी जनगणना
पहला चरण (अप्रैल से सितंबर 2026):
इसे हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन कहा जाएगा। इस चरण में देशभर के घरों, दुकानों और अन्य इमारतों की गणना की जाएगी।
दूसरा चरण (फरवरी 2027):
इस चरण में जनसंख्या गणना होगी, जिसमें हर व्यक्ति से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी दर्ज की जाएगी।
नागरिकों को मिलेगी स्व-गणना की सुविधा
इस बार सरकार ने नागरिकों को स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा भी दी है। घर-घर सर्वे शुरू होने से 15 दिन पहले एक ऑनलाइन पोर्टल खोला जाएगा, जहां लोग मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से अपने परिवार की जानकारी खुद भर सकेंगे।
इसके बाद अगले 30 दिनों के भीतर गणनाकर्मी घर-घर जाकर बाकी विवरण मोबाइल ऐप के जरिए दर्ज करेंगे।
95 साल बाद होगी व्यापक जातिगत गणना
आजादी के बाद यह पहली बार होगा जब जनगणना में जाति से जुड़े आंकड़े डिजिटल रूप से एकत्र किए जाएंगे। इससे पहले वर्ष 1931 में ब्रिटिश शासन के दौरान अंतिम जातिगत गणना हुई थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने इस प्रस्ताव को पिछले साल मंजूरी दी थी। पूरा डेटा एंड्रॉइड और आईओएस ऐप के माध्यम से सुरक्षित सर्वर पर अपलोड किया जाएगा, जिससे गलतियों की संभावना कम होगी।
किन जानकारियों का होगा संग्रह
पहले चरण में यह दर्ज किया जाएगा कि मकान कच्चा है या पक्का, साथ ही घर में उपलब्ध
- बिजली
- पीने का पानी
- शौचालय
- खाना पकाने का ईंधन
जैसी बुनियादी सुविधाओं की जानकारी ली जाएगी।
इसके अलावा लोगों के जीवन स्तर का आकलन करने के लिए स्मार्टफोन, इंटरनेट, टीवी, फ्रिज और वाहनों जैसी सुविधाओं का भी रिकॉर्ड रखा जाएगा।
30 लाख कर्मचारी होंगे तैनात
इस विशाल प्रक्रिया को पूरा करने के लिए देशभर में लगभग 30 लाख कर्मचारियों को लगाया जाएगा।
2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी करीब 121 करोड़ थी, जिसके अब काफी बढ़ने का अनुमान है।


