पटना। केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में मनरेगा की जगह ‘जी राम जी’ (VB–G RAM G) बिल लाए जाने के बाद सियासत तेज हो गई है। विपक्ष जहां इसे महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी योजना को खत्म करने की कोशिश बता रहा है, वहीं बिहार में एनडीए के सभी घटक दल एकजुट होकर इस विधेयक के समर्थन में उतर आए हैं। सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर जानबूझकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है।
बिहार एनडीए की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस
पटना में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी, जेडीयू और लोजपा (रामविलास) के नेताओं ने इस बिल को ग्रामीण मजदूरों और किसानों के हित में बताया।
‘राम के नाम से विपक्ष को लगी मिर्ची’ – संजय सरावगी
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि यह कानून गांवों की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए लाया गया है, लेकिन विपक्ष को सिर्फ नाम से आपत्ति है।
“जी राम जी बिल में राम शब्द है, इसलिए विपक्ष को मिर्ची लग रही है। भगवान श्रीराम के नाम से ही उन्हें परेशानी हो रही है। यह कानून ग्रामीण व्यवस्था को मजबूत करने और गरीब किसान-मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए है।”
— संजय सरावगी, प्रदेश अध्यक्ष, बिहार बीजेपी
‘विपक्ष कर रहा दुष्प्रचार’ – उमेश कुशवाहा
जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि नए कानून के तहत मजदूरों को पहले से अधिक लाभ मिलेगा।
“मनरेगा में जहां 100 दिन रोजगार की गारंटी थी, वहीं अब वीबी-जी राम जी बिल के तहत साल में 125 दिन रोजगार की गारंटी दी गई है। रोजगार के अधिकार को खत्म करने का आरोप पूरी तरह निराधार है।”
— उमेश कुशवाहा, प्रदेश अध्यक्ष, जेडीयू (बिहार)
उन्होंने कहा कि इस कानून से पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, लेकिन विपक्ष जानबूझकर लोगों को गुमराह कर रहा है।
भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगेगा – राजू तिवारी
लोजपा (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी ने कहा कि मनरेगा में भ्रष्टाचार की शिकायतें लंबे समय से रही हैं।
“पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने खुद कहा था कि केंद्र से भेजे गए 100 रुपये में से 10 रुपये ही गरीब तक पहुंचते हैं। इस नए कानून से भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगेगा। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बधाई के पात्र हैं।”
— राजू तिवारी, प्रदेश अध्यक्ष, लोजपा (रामविलास)
क्या है ‘जी राम जी’ बिल?
- 18 दिसंबर 2025 को लोकसभा में ग्रामीण रोजगार से जुड़ा यह नया कानून पारित हुआ
- पूरा नाम: विकासशील भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)
- संक्षिप्त नाम: VB–G RAM G (जी राम जी)
- इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को समाप्त करने का प्रस्ताव
- मनरेगा की शुरुआत 2005 में यूपीए सरकार ने की थी
विपक्ष का विरोध जारी
कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल इस बिल का विरोध कर रहे हैं और इसे महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी योजना को खत्म करने की साजिश बता रहे हैं। वहीं एनडीए का कहना है कि यह सिर्फ नाम बदलने का नहीं, बल्कि रोजगार के दायरे को बढ़ाने और व्यवस्था सुधारने का कानून है।


