बेतिया। सरकारी अस्पतालों में इलाज के नाम पर मरीजों को निजी नर्सिंग होम तक पहुंचाने वाले बिचौलियों का खेल एक बार फिर सामने आया है। तस्वीर में दिख रहे शख्स सुखट बैठा, बेतिया के मिसरौली निवासी हैं, जो अपनी बेटी प्रियंका का इलाज कराने के लिए बकरी और घर का सामान बेचकर बेतिया स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) पहुंचे थे।
इलाज के बहाने गोरखपुर ले जाने का आरोप
सुखट बैठा ने बताया कि जीएमसीएच में तीन-चार दिनों तक इलाज चलने के बाद एक व्यक्ति उनसे संपर्क में आया और कहा कि यहां सही इलाज नहीं होगा। उसने गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने का भरोसा दिलाया और 10 से 15 हजार रुपये खर्च होने की बात कही। उसकी बातों में आकर सुखट बैठा बेटी को लेकर गोरखपुर चले गए।
सरकारी नहीं, निजी अस्पताल में कराया भर्ती
सुखट बैठा का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने उन्हें गोरखपुर के किसी सरकारी अस्पताल में नहीं, बल्कि एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती करा दिया। कुछ दिनों के इलाज के बाद अस्पताल प्रबंधन ने 30 से 40 हजार रुपये का बिल थमा दिया। बिल चुकाने में असमर्थ होने पर उन्हें धमकाया भी गया।
इसके बाद किसी तरह व्यवस्था कर सुखट बैठा अपनी बेटी को वहां से निकालकर दोबारा बेतिया के जीएमसीएच में भर्ती कराने में सफल हुए।
“मेरी बेटी का गोरखपुर में सही से इलाज नहीं हुआ, उल्टा भारी भरकम बिल थमा दिया गया। पैसे नहीं देने पर धमकी दी गई। तब समझ आया कि हम बिचौलियों के शिकार हो गए।”
— सुखट बैठा, मरीज के पिता
पहला मामला नहीं, संगठित गिरोह सक्रिय
इस मामले की पड़ताल में सामने आया कि सुखट बैठा अकेले नहीं हैं। जीएमसीएच परिसर में सक्रिय कुछ प्राइवेट एंबुलेंस चालक और बिचौलिये इसी तरह मरीजों और उनके परिजनों को बहकाकर यूपी के निजी अस्पतालों में ले जाते हैं। इसके बदले उन्हें मोटा कमीशन मिलता है।
एंबुलेंस चालक बनता है ‘डॉक्टर’
जांच के दौरान ऐसी तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें एक व्यक्ति कभी एंबुलेंस चालक तो कभी डॉक्टर की वेशभूषा में अस्पताल परिसर में घूमता नजर आता है। वह मरीजों की जांच का नाटक कर उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए तैयार करता है।
निजी अस्पतालों में मोटी वसूली का आरोप
आरोप है कि निजी नर्सिंग होम में इलाज के नाम पर मरीजों से लाखों रुपये वसूले जाते हैं। कई मामलों में परिजनों को जमीन और घर गिरवी रखकर बिल चुकाना पड़ता है। पैसा न देने पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा धमकी दिए जाने की भी शिकायतें सामने आई हैं।
अस्पताल प्रशासन का बयान
जीएमसीएच की अधीक्षक सुधा भारती ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है और संबंधित तस्वीरों की जांच की जा रही है। अस्पताल परिसर में बिचौलियों से सावधान रहने के लिए पोस्टर लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
“तस्वीरों की जांच की जा रही है। संबंधित व्यक्ति की पहचान कर कार्रवाई होगी। मरीजों को किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए।”
— सुधा भारती, अधीक्षक, जीएमसीएच
जिलाधिकारी ने दिए जांच के निर्देश
बेतिया के जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने भी मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बरगलाने वाले एंबुलेंस चालकों और बिचौलियों पर कार्रवाई की जाएगी।
“ऐसे मामले सामने आए हैं। जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
— तरनजोत सिंह, डीएम, बेतिया
मरीजों को भुगतना पड़ता है खामियाजा
बिचौलियों के इस खेल का सबसे बड़ा नुकसान गरीब और जरूरतमंद मरीजों को उठाना पड़ता है। कई बार निजी अस्पतालों के चक्कर में मरीज की हालत बिगड़ जाती है,甚至 मौत तक हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मरीज और उनके परिजनों को केवल अधिकृत डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन की सलाह पर ही भरोसा करना चाहिए।


