वैशाली में जमीन विवाद के कारण स्कूल में तालाबंदी, 4 दिनों से ठप पढ़ाई, धरने पर बैठे ग्रामीण

वैशाली। बिहार के वैशाली जिले में जमीन विवाद के चलते एक सरकारी स्कूल में दूसरी बार तालाबंदी कर दी गई है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक स्कूल से जुड़ा जमीन विवाद नहीं सुलझता, तब तक वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे। फिलहाल बीते चार दिनों से विद्यालय में ताला लटका हुआ है और ग्रामीण धरने पर बैठे हैं।

उत्क्रमित मध्य विद्यालय भटौलीया का मामला

यह मामला जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर नगर पंचायत गोरौल स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय भटौलीया से जुड़ा है। भूमिदाता परिवार और ग्रामीणों ने विद्यालय में तालाबंदी कर सभी शिक्षकों को बाहर निकाल दिया है। शिक्षक सड़क किनारे बैठने को मजबूर हैं। सूचना पर पहुंचे प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) सुशील कुमार को भी ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा।

65 साल पहले दान दी गई थी जमीन

ग्रामीणों के अनुसार, करीब 65 साल पहले तत्कालीन मुखिया स्वर्गीय रामचंद्र साह ने विद्यालय के लिए 41 डिसमिल (लगभग 13 कट्ठा) जमीन दान दी थी। इसी जमीन पर विद्यालय का निर्माण हुआ और पढ़ाई शुरू हुई। वर्षों से स्कूल संचालित हो रहा है, लेकिन आज तक सरकार की ओर से जमीन की विधिवत रजिस्ट्री नहीं कराई गई।

विद्यालय से पढ़कर कई छात्र जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल कर चुके हैं। स्कूल में एक नवसृजित प्राथमिक विद्यालय भी टैग किया गया है।

400 छात्र नामांकित, खुले आसमान के नीचे पढ़ाई

विद्यालय में दोनों शैक्षणिक इकाइयों को मिलाकर करीब 400 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जिनमें से औसतन 300 बच्चे प्रतिदिन उपस्थित रहते हैं। कक्षाओं की कमी के कारण बच्चों को कई बार पेड़ के नीचे या खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण स्कूल को दो शिफ्ट में संचालित किया जा रहा है।

जब अतिरिक्त भवन निर्माण के लिए फंड आया और निर्माण कार्य शुरू हुआ, तब पता चला कि विद्यालय के नाम से जमीन की रजिस्ट्री ही नहीं है।

भविष्य को लेकर ग्रामीणों की चिंता

ग्रामीणों का कहना है कि यदि भूमिदाता परिवार के सदस्यों के रहते जमीन की रजिस्ट्री नहीं हुई और भविष्य में उत्तराधिकारियों का मन बदल गया, तो स्कूल पर संकट आ सकता है। इसी आशंका के चलते पहले 20 अक्टूबर 2024 को भी विद्यालय में तालाबंदी की गई थी। अब एक बार फिर स्कूल में ताला लगा हुआ है।

डीएम के निर्देश के बावजूद नहीं मिली एनओसी

भूमिदाता के पौत्र प्रशांत कुमार ने बताया कि 20 अक्टूबर 2024 को एक हजार रुपये के स्टांप पेपर पर जिलाधिकारी को आवेदन देकर जमीन विद्यालय के नाम रजिस्ट्री कराने और निबंधन शुल्क माफ करने की मांग की गई थी। डीएम के निर्देश पर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने अंचलाधिकारी से एनओसी मांगी, लेकिन तत्कालीन सीओ द्वारा एनओसी जारी नहीं की गई।

“जमीन रजिस्ट्री कराएं या वापस करें”

प्रशांत कुमार का कहना है कि उनके दादा ने करीब 70 साल पहले स्कूल के लिए जमीन दान दी थी, लेकिन आज तक सरकार ने रजिस्ट्री नहीं कराई। उन्होंने कहा कि जमीन की कीमत लगभग दो करोड़ रुपये है, इसके बावजूद परिवार की ओर से कोई मांग नहीं की गई है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जमीन की रजिस्ट्री नहीं हुई तो वे कानूनी रास्ता अपनाएंगे।

प्रधानाध्यापक का आरोप

विद्यालय के प्रधानाध्यापक अशोक कुमार ने बताया कि ग्रामीणों ने तालाबंदी कर दी है। जब शिक्षकों ने स्कूल खोलने का अनुरोध किया तो ग्रामीणों ने जमीन खाली करने या किराया देने की बात कही। इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है।

प्रशासन का आश्वासन

प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुशील कुमार ने बताया कि विद्यालय भूमिदाता की जमीन पर संचालित है और परिवार जमीन की रजिस्ट्री चाहता है। उन्होंने कहा कि कागजी प्रक्रिया में देरी हुई है, लेकिन डीसीएलआर और अंचलाधिकारी से बातचीत चल रही है।

उन्होंने दावा किया कि आवश्यक दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं और जल्द ही जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर मामले का समाधान कर लिया जाएगा।

जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया

नियमों के अनुसार, दान की गई जमीन की रजिस्ट्री के लिए जिलाधिकारी को आवेदन दिया जाता है। इसके बाद राजस्व विभाग द्वारा अभिलेखों का सत्यापन कर निशुल्क रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की जाती है। फिलहाल इसी प्रक्रिया में देरी के कारण स्कूल की पढ़ाई पूरी तरह ठप है।


 

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