बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) के नवनियुक्त अध्यक्ष और पूर्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आलोक राज ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
1 जनवरी 2026 को संभाला था पदभार
आलोक राज ने 1 जनवरी 2026 को BSSC अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला था। लेकिन महज कुछ ही दिनों के भीतर उनका इस्तीफा सामने आना कई सवाल खड़े कर रहा है। उन्होंने अपना त्यागपत्र सामान्य प्रशासन विभाग को सौंप दिया है।
इस्तीफे का कारण बताया व्यक्तिगत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आलोक राज ने अपने इस्तीफे का कारण व्यक्तिगत बताया है। उल्लेखनीय है कि सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना के अनुसार उन्हें इस पद पर पांच वर्षों की अवधि या 65 वर्ष की आयु तक (जो पहले हो) के लिए नियुक्त किया गया था। ऐसे में इतने कम समय में पद छोड़ने का निर्णय चौंकाने वाला माना जा रहा है।
कौन हैं आलोक राज?
आलोक राज 1989 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं। उन्होंने बिहार पुलिस में कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं और महानिदेशक (DGP) के पद से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद राज्य सरकार ने उन्हें BSSC जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील आयोग की जिम्मेदारी सौंपी थी।
उनकी नियुक्ति से प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, समयबद्ध परीक्षा आयोजन और चयन प्रक्रिया में सुधार की उम्मीद की जा रही थी।
चर्चाओं का बाजार गर्म
आलोक राज के इस्तीफे के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या इसके पीछे सिर्फ निजी कारण हैं या कोई अन्य वजह भी। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर किसी विवाद की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इतने कम समय में लिया गया यह फैसला अटकलों को जरूर जन्म दे रहा है।
आयोग के कामकाज पर पड़ सकता है असर
BSSC अध्यक्ष का पद रिक्त होने से आयोग की कार्यप्रणाली पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। बिहार कर्मचारी चयन आयोग राज्य की कई महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन करता है। ऐसे में आगामी परीक्षाओं, लंबित परिणामों और भर्ती प्रक्रियाओं पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। आयोग पहले से ही कई मामलों को लेकर दबाव में है।
अगला अध्यक्ष कौन?
अब सभी की निगाहें बिहार सरकार पर टिकी हैं कि आलोक राज का इस्तीफा कब स्वीकार किया जाता है और उनके स्थान पर किसे BSSC अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। माना जा रहा है कि आयोग के कामकाज को सुचारु बनाए रखने के लिए सरकार जल्द ही इस दिशा में फैसला ले सकती है।


