अररिया जिले के बौसी थाना क्षेत्र से मानव तस्करी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 12 वर्ष की उम्र में दलालों के चंगुल में फंसा बच्चा करीब 13 वर्ष बाद म्यांमार से मुक्त होकर अपने घर लौट आया। लंबे समय तक चले मां के संघर्ष और कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार दलालों को झुकना पड़ा और पीड़ित युवक को भारत वापस भेजा गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बौसी थाना क्षेत्र का रहने वाला मुन्ना वर्ष 2012 में मात्र 12 वर्ष की आयु में काम दिलाने के बहाने एक ब्रोकर के साथ बनारस गया था। वहां से उसे गुवाहाटी, नागालैंड होते हुए कंटेनर में लोड कर अवैध तरीके से म्यांमार पहुंचा दिया गया। म्यांमार में उससे लोहा गलाने की फैक्ट्री में जबरन मजदूरी कराई जाती थी। काम से इनकार करने पर उसे शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी जाती थी, यहां तक कि डराने के लिए सुई लगाकर भी यातनाएं दी गईं।
इधर, बेटे के लापता होने के बाद उसकी मां जरीना खातून ने वर्ष 2012 में बौसी थाना में मामला दर्ज कराया। इसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार प्रशासन, पुलिस और न्यायालय के चक्कर लगाती रहीं। मां के इस लंबे संघर्ष और कोर्ट के दबाव का ही नतीजा रहा कि करीब 13 साल बाद उनका बेटा सुरक्षित अपने देश लौट सका।
भारत लौटने के बाद मुन्ना को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां सभी कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद बाल कल्याण समिति ने उसे उसकी मां जरीना खातून को सौंप दिया। बेटे को सकुशल पाकर मां की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
बाल कल्याण समिति ने इस मामले को नेपाल सीमा से सटे सीमावर्ती इलाकों में फैले मानव तस्करी और बाल मजदूरी के बड़े नेटवर्क से जोड़कर देखा है। समिति का कहना है कि सीमांचल क्षेत्र में मानव तस्करी का संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो गरीब और कमजोर परिवारों के बच्चों को बहला-फुसलाकर विदेश तक भेज देता है।
मुक्त होकर लौटे मुन्ना ने बाल कल्याण समिति के समक्ष अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उसे वर्षों तक अमानवीय हालात में काम करने के लिए मजबूर किया गया। वहीं बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दीपक वर्मा ने कहा कि यह मामला सीमांचल में सक्रिय मानव तस्करी के नेटवर्क को उजागर करता है और इस दिशा में प्रशासन को सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
इस घटना के सामने आने के बाद एक बार फिर मानव तस्करी और बाल मजदूरी जैसे गंभीर मुद्दों पर सवाल खड़े हो गए हैं और प्रशासन से ऐसे नेटवर्क के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।


