पटना। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत 2 जनवरी 2026 को दो दिवसीय दौरे पर पटना पहुंचेंगे। इस दौरान वे पटना हाईकोर्ट की कई महत्वाकांक्षी और आधुनिक परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे, जिससे राज्य की न्यायिक व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
पटना हाईकोर्ट परिसर में बड़े प्रोजेक्ट्स की आधारशिला
3 जनवरी 2026 को जस्टिस सूर्यकांत पटना हाईकोर्ट परिसर में कई अहम परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। इनमें एडीआर (ADR) बिल्डिंग, अत्याधुनिक ऑडिटोरियम, प्रशासनिक ब्लॉक, मल्टी लेवल पार्किंग, आईटी बिल्डिंग, आवासीय परिसर, महाधिवक्ता कार्यालय की एनेक्सी और हॉस्पिटल बिल्डिंग शामिल हैं।
इन सभी परियोजनाओं का निर्माण लगभग 302.56 करोड़ रुपये की लागत से 46,675 वर्ग मीटर क्षेत्र में किया जाएगा।
ई-एसीआर सॉफ्टवेयर का होगा शुभारंभ
इसी दिन पटना हाईकोर्ट की प्रोग्रामर टीम द्वारा विकसित ई-एसीआर (Annual Confidential Report) सॉफ्टवेयर का भी लोकार्पण किया जाएगा। यह सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म न्यायिक अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाएगा।
गया गेस्ट हाउस का डिजिटल उद्घाटन
सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत गया में जजों के लिए निर्मित गेस्ट हाउस का डिजिटल उद्घाटन भी करेंगे। इसके अलावा पटना जिले के पोठही, पुनपुन ब्लॉक में प्रस्तावित बिहार न्यायिक अकादमी के नए परिसर के लिए भूमि पूजन समारोह में वे स्वयं उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर पटना हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुधीर सिंह सहित कई वरिष्ठ न्यायाधीश मौजूद रहेंगे।
न्यायिक व्यवस्था को मिलेगा आधुनिक स्वरूप
इन सभी परियोजनाओं का क्रियान्वयन बिहार सरकार के विधि विभाग की देखरेख में किया जा रहा है। इनके पूरा होने से न्यायालयों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और आम लोगों को भी तेज़ व सुगम न्याय मिलने में मदद मिलेगी।
लॉ यूनिवर्सिटी के दीक्षा समारोह में होंगे मुख्य अतिथि
3 जनवरी को ही पूर्वाह्न 11 बजे जस्टिस सूर्यकांत मीठापुर स्थित चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के दीक्षा समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पटना हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुधीर सिंह करेंगे। इस दौरान सीजेआई छात्रों को संबोधित भी करेंगे।
सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत का यह दौरा बिहार की न्यायिक व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे न्यायिक ढांचे में आधुनिकता और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।


