पटना। भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय ने ओडिशा हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संगम कुमार साहू को पटना हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की अधिसूचना जारी कर दी है। यह नियुक्ति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा की गई है और उनके पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 18 दिसंबर 2025 को हुई अपनी बैठक में जस्टिस संगम कुमार साहू को पटना हाईकोर्ट का 47वां मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी। यह अनुशंसा देश के विभिन्न हाईकोर्ट्स में रिक्त मुख्य न्यायाधीशों के पदों को भरने के उद्देश्य से की गई थी।
अन्य हाईकोर्ट्स में भी नियुक्तियां
कॉलेजियम ने इसी बैठक में उत्तराखंड, झारखंड, सिक्किम और मेघालय हाईकोर्ट के लिए भी नए मुख्य न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश की थी। इनमें से कुछ नियुक्तियों की अधिसूचना जारी हो चुकी है, जबकि कुछ पर प्रक्रिया अभी जारी है। पटना हाईकोर्ट में यह नियुक्ति न्यायिक प्रशासन को और सुदृढ़ बनाएगी।

शपथ और पदभार ग्रहण
अधिसूचना जारी होने के बाद बिहार के राज्यपाल जस्टिस संगम कुमार साहू को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। इसके बाद वे औपचारिक रूप से पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का कार्यभार संभालेंगे। फिलहाल पटना हाईकोर्ट में जस्टिस सुधीर सिंह कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
जस्टिस साहू का शैक्षणिक और न्यायिक सफर
जस्टिस संगम कुमार साहू का जन्म ओडिशा में हुआ। उन्होंने नुआबाजार हाई स्कूल से मैट्रिक, स्टीवर्ट साइंस कॉलेज, कटक से आईएससी और बीएससी की पढ़ाई की। इसके बाद उत्कल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी एवं ओड़िया में एमए तथा लॉ कॉलेज, कटक से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की।
वकालत से न्यायाधीश तक
उन्होंने 26 नवंबर 1989 को ओडिशा स्टेट बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया। उनका प्रमुख कार्यक्षेत्र आपराधिक कानून और सेवा संबंधी मामले रहे। उन्होंने जिला न्यायालयों, ओडिशा हाईकोर्ट, उपभोक्ता फोरम, एसएटी और सीएटी में प्रभावी प्रैक्टिस की। 2 जुलाई 2014 को उन्हें ओडिशा हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
पटना हाईकोर्ट को मिलेगा अनुभव का लाभ
जस्टिस संगम कुमार साहू को न्यायिक प्रशासन का व्यापक अनुभव है। उनकी नियुक्ति से पटना हाईकोर्ट में लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। यह नियुक्ति भारतीय न्यायपालिका में पारदर्शिता, वरिष्ठता और अनुभव के सिद्धांतों को भी मजबूती प्रदान करती है।


