मुंगेर: नए साल से पहले नक्सलवाद को बड़ा झटका, 6 लाख के इनामी नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

साल 2025 के अंत में बिहार को नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। कुख्यात नक्सलियों ने हथियार डालकर हिंसा का रास्ता छोड़ समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। रविवार को मुंगेर में बिहार के डीजीपी विनय कुमार और एडीजी कुंदन कृष्णन के समक्ष तीन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें 3-3 लाख के इनामी जोनल कमांडर नारायण कोड़ा और बहादुर कोड़ा शामिल हैं।

डीजीपी ने फूल माला पहनाकर किया स्वागत

यह ऐतिहासिक दृश्य हवेली खड़गपुर थाना क्षेत्र स्थित आरएसके कॉलेज परिसर में देखने को मिला, जहां डीजीपी विनय कुमार ने तीनों आत्मसमर्पित नक्सलियों का फूलों की माला पहनाकर स्वागत किया। इस मौके पर एडीजी हेडक्वार्टर कुंदन कृष्णन, एसटीएफ एसपी संजय सिंह सहित कई वरीय पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

कई नक्सली मामलों में फरार थे आत्मसमर्पण करने वाले

पुलिस के अनुसार—

  • नारायण कोड़ा, पिता स्व. रतु कोड़ा, 23 नक्सली मामलों में फरार जोनल कमांडर, लडैयाटांड़ थाना क्षेत्र के पैसरा गांव का निवासी
  • बहादुर कोड़ा, पिता स्व. चुटर कोड़ा, 24 नक्सली मामलों में फरार जोनल कमांडर, हवेली खड़गपुर के बघेल गांव का निवासी
  • बिनोद कोड़ा, पिता सोनेलाल कोड़ा, 3 नक्सली मामलों में फरार दस्ता सदस्य, लखीसराय के शीतला कोड़ासी गांव का निवासी

तीनों ने स्वेच्छा से हिंसा का रास्ता छोड़ आत्मसमर्पण किया।

भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद सौंपा

आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने—

  • 2 इंसास राइफल
  • 4 एसएलआर राइफल
  • 500 राउंड गोलियां
  • 10 वॉकी-टॉकी

पुलिस के हवाले किए। इस मौके पर पूर्व में आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली रावण कोड़ा और भोला कोड़ा के परिजन भी उपस्थित रहे।

डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि बिहार सरकार और मुंगेर जिला प्रशासन की ओर से आत्मसमर्पित नक्सलियों और उनके परिवारों को पुनर्वास, सुरक्षा और सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।

नक्सल मुक्त इलाकों में तेज हुआ विकास

डीजीपी ने कहा कि बिहार में उग्रवाद दशकों तक विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा रहा। एक समय 38 जिलों और 2 पुलिस जिलों में से 23 जिले नक्सल प्रभावित थे, जिनमें मुंगेर भी शामिल था। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं।

“बिहार देश का पहला राज्य है, जहां नक्सलवाद के खिलाफ लगातार और निर्णायक अभियान चलाया गया है। 2005 से अरवल और जहानाबाद पूरी तरह नक्सल मुक्त हैं। अब इन इलाकों में सड़कें बन रही हैं, सरकारी योजनाएं पहुंच रही हैं और नक्सलवाद का असर लगभग खत्म हो चुका है।”
विनय कुमार, डीजीपी, बिहार

नए साल में शांति और विकास की उम्मीद

नक्सलियों के आत्मसमर्पण को नए साल से पहले शांति, विकास और विश्वास की बड़ी जीत माना जा रहा है। यह कदम न केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि नक्सल प्रभावित इलाकों में तेज विकास और सामाजिक बदलाव की राह भी खोलेगा।


 

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