भागलपुर संग्रहालय को मिली अमूल्य विरासत, गुआरिडीह से प्राप्त 1000 से अधिक पुरातात्विक सामग्रियां संग्रहित

भागलपुर, 24 दिसंबर 2025।भागलपुर जिले के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी के प्रयास से आज बड़ी संख्या में पुरातात्विक महत्व की वस्तुएं में जमा कराई गईं।

ये सभी सामग्रियां भागलपुर जिले के (बिहपुर प्रखंड) से प्राप्त हुई हैं, जो कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार द्वारा घोषित तीन संरक्षित क्षेत्रों में से एक है। वर्षों से ये सामग्रियां जयरामपुर निवासी के मुर्गी फार्म में सुरक्षित रखी गई थीं।

1033 टुकड़ों में 38 प्रकार की पुरातात्विक वस्तुएं
जमा कराई गई सामग्रियों में मुख्य रूप से टेराकोटा की वस्तुएं शामिल हैं। इसके अलावा पत्थर के जांते का हिस्सा, सिलबट्टा और लोढ़ी, नाद, मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े, रेड-ब्लैक वेयर, पॉलिश्ड ब्लैक वेयर के टुकड़े, कच्ची मिट्टी के चूल्हे के अवशेष, मिट्टी के खिलौने, कंचे, जानवरों की हड्डियां और तीन तांबे के पंचमार्क सिक्के भी शामिल हैं। कुल मिलाकर 1033 टुकड़ों में 38 प्रकार की पुरातात्विक सामग्रियां संग्रहालय को सौंपी गईं।

निरीक्षण के दौरान मिली जानकारी
बताया गया कि गुआरिडीह स्थल के निरीक्षण के दौरान जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन को यह जानकारी मिली कि अविनास चौधरी के पास वर्षों से पुरातात्विक महत्व की सामग्रियां संग्रहित हैं। इसके बाद उनसे संपर्क कर इन वस्तुओं को संग्रहालय में सुरक्षित रखने का अनुरोध किया गया। पहले सभी सामग्रियों का विधिवत डॉक्युमेंटेशन किया गया और फिर 24 दिसंबर 2025 को इन्हें संग्रहालय को सौंप दिया गया।

अंग प्रदेश के इतिहास की अमूल्य धरोहर
इस अवसर पर अंकित रंजन ने कहा कि ये सभी सामग्रियां अंग प्रदेश के इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं। संग्रहालय में सुरक्षित रखने से भविष्य में दर्शक, विद्यार्थी और शोधार्थी अपने अतीत को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। उन्होंने बताया कि मुर्गी फार्म में लंबे समय तक रखे जाने से कई वस्तुएं नष्ट होने की कगार पर थीं और चोरी का भी खतरा बना हुआ था।

उन्होंने आम लोगों से अपील की कि यदि किसी के पास भी इस तरह की पुरातात्विक सामग्री हो, तो तत्काल जिला प्रशासन को सूचित करते हुए उसे संग्रहालय में जमा कराएं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार ये सामग्रियां ताम्रपाषाण युग से लेकर पाल काल तक की हो सकती हैं। विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद इन्हें संरक्षित कर भागलपुर संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा।

संग्रहकर्ता की भावुक प्रतिक्रिया
संग्रहकर्ता अविनास चौधरी ने बताया कि वे वर्षों से संरक्षित क्षेत्र में कटाव स्थल पर जाते थे और वहां मिलने वाली सामग्रियों को सुरक्षित रखते थे। गांव और परिवार के लोग उन्हें पागल समझते थे, लेकिन आज वही सामग्रियां देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। उन्होंने कहा कि अब जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी के प्रयास से उनकी वर्षों की मेहनत सुरक्षित हाथों में पहुंच गई है।

इस अवसर पर टीएमबीयू के शोधार्थी से जुड़े आयशा, आनंद, रोजी, रितेश और फैसल सहित कई स्थानीय लोग भी मौजूद रहे।

भागलपुर संग्रहालय को मिली यह विरासत न सिर्फ जिले के गौरव को बढ़ाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेगी।

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