बिहार कांग्रेस में उथल-पुथल: चुनावी हार के बाद 15 जिला अध्यक्षों को नोटिस, नेतृत्व पर मनमानी के आरोप तेज

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी अब आंतरिक विवादों से घिरती दिख रही है। 1 दिसंबर को पटना में दिल्ली रैली को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में 15 जिला अध्यक्ष शामिल नहीं हुए, जिसके बाद पार्टी नेतृत्व ने सभी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कई जिला अध्यक्षों ने अब प्रदेश नेतृत्व पर “मनमानी”, “एकतरफा कार्रवाई” और “कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने” का आरोप लगाया है।


“तबीयत खराब थी, फिर भी नोटिस भेज दिया” — भागलपुर जिला अध्यक्ष

भागलपुर कांग्रेस जिला अध्यक्ष परवेज आलम ने कहा कि उनकी तबीयत बेहद खराब थी, शुगर लेवल बढ़ा हुआ था और डॉक्टर ने आराम की सलाह दी थी। इसके बावजूद उन्हें नोटिस दे दिया गया।

उन्होंने कहा:

“प्रदेश अध्यक्ष को मैंने पहले ही अपनी तबीयत की जानकारी दे दी थी। रैली में शामिल होने जा रहा हूं, लेकिन किसी को जबरदस्ती साथ ले जाने की जिम्मेदारी मैं नहीं उठा सकता। कार्यकर्ता पहले ही हताश हैं, कोई भी खर्च करने को तैयार नहीं है।”


शादी के दिन मिला नोटिस — पूर्वी चंपारण अध्यक्ष का आरोप

पूर्वी चंपारण के जिला अध्यक्ष शशिभूषण राय ने कहा कि 1 दिसंबर की बैठक के दिन उनकी बेटी की शादी थी। उन्होंने प्रदेश नेताओं को निमंत्रण पत्र भी दिया था, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। उल्टा उन्हें नोटिस भेज दिया गया।

उन्होंने कहा:

“शादी में न आए, और नोटिस भेजकर मुझसे ही जवाब मांगा जा रहा है। रैली में जाऊंगा, लेकिन कितने लोगों को ले जा पाऊंगा यह तय नहीं है।”


“बैठक की कोई जानकारी ही नहीं दी गई” — मधुबनी जिला अध्यक्ष

मधुबनी जिला अध्यक्ष सुबोध मंडल ने दावा किया कि उन्हें बैठक की कोई सूचना ही नहीं दी गई थी।

उन्होंने कहा:

“दिल्ली की बैठक में राहुल गांधी ने मेरे काम की सराहना की थी। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष बिना जानकारी के नोटिस भेज रहे हैं। यह मनोबल गिराने वाला कदम है।”


“एक घंटा पहले सूचना मिली, कैसे पहुँचते?” — पश्चिम चंपारण अध्यक्ष

पश्चिम चंपारण अध्यक्ष प्रमोद सिंह पटेल ने कहा कि उन्हें बैठक की सूचना सिर्फ एक घंटा पहले मिली, जबकि पटना 300 किलोमीटर दूर है।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा:

“एक घंटे में पटना पहुंचना असंभव था। हार के बाद कार्यकर्ता पहले से ही निराश हैं, ऐसे में इस तरह का नोटिस मनोबल और तोड़ देता है।”


इन 15 जिला अध्यक्षों को जारी हुआ नोटिस

नोटिस पाने वालों में शामिल हैं:
पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, अररिया, मधुबनी, कटिहार, पटना ग्रामीण-1, पटना ग्रामीण-2, सुपौल, भागलपुर, जमुई, बक्सर, गया, लखीसराय, मुंगेर और शेखपुरा


14 दिसंबर को दिल्ली में रैली, सभी जिलों को मिली जिम्मेदारी

कांग्रेस 14 दिसंबर को दिल्ली में “वोट चोरी” और चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोपों को लेकर बड़ी रैली करने जा रही है। सभी जिला अध्यक्षों को अपने-अपने जिले से कार्यकर्ताओं को दिल्ली ले जाने का निर्देश दिया गया है।


प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम का जवाब: “नोटिस देना एक परिवारिक प्रक्रिया”

प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा:

“यदि परिवार में कोई कार्यक्रम हो और कोई शामिल न हो, तो पूछा जाता है। नोटिस को मैं नकारात्मक नहीं, सकारात्मक सोच मानता हूं।”

उन्होंने कहा कि उन्हें जिला अध्यक्षों की बीमारी या मजबूरी की जानकारी नोटिस के बाद ही मिली।


चुनावी हार पर राजेश राम बोले — “प्रशासनिक मिलीभगत और वोट चोरी”

राजेश राम ने कहा कि चुनाव में कांग्रेस को वोट चोरी, सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और निर्वाचन आयोग की “मदद” के कारण हार का सामना करना पड़ा।

उनका आरोप:

“मतदान के दौरान महिलाओं के खाते में 10,000 रुपये भेजे गए। आशा और जीविका दीदी वोटरों को प्रभावित कर रही थीं।”


विधायक दल का नेता अभी तय नहीं

6 विधायक जीतने के बावजूद कांग्रेस अब तक विधायक दल का नेता तय नहीं कर पाई है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बातचीत पूरी हो चुकी है और केंद्रीय नेतृत्व जल्द फैसला करेगा।


राजद से गठबंधन पर क्या बोले?

उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनावों के समय गठबंधन करती है। फिलहाल पार्टी अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है।


निष्कर्ष

बिहार कांग्रेस चुनावी हार के बाद गंभीर अंदरूनी खींचतान से गुजर रही है। एक तरफ जिला अध्यक्ष नेतृत्व पर मनमानी के आरोप लगा रहे हैं, दूसरी तरफ नेतृत्व नोटिस को “परिवारिक प्रक्रिया” बता रहा है। दिल्ली रैली से पहले इस विवाद ने पार्टी की स्थिति और चुनौतीपूर्ण बना दी है।


 

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