बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र 5 दिसंबर को पांच दिनों की बैठकों के बाद समाप्त हो गया। सत्र के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर जोरदार बहस, नोकझोंक और तीखी राजनीतिक बयानबाज़ी देखने को मिली। एक तरफ बुलडोजर कार्रवाई, शराबबंदी, बालू–जमीन माफिया पर सत्तापक्ष का आक्रामक जवाब रहा, वहीं दूसरी ओर विपक्षी नेता तेजस्वी यादव की लगातार अनुपस्थिति पूरे सत्र में चर्चा का विषय बनी रही।
सत्तापक्ष का विपक्ष पर पलटवार — बुलडोजर कार्रवाई और माफिया मुद्दे पर तीखी बहस
सत्र के चौथे दिन डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा और मंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों पर कड़ा जवाब दिया। बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने सरकार पर मनमानी और टारगेटेड कार्रवाई का आरोप लगाया, जबकि सत्तापक्ष ने इसे “कानूनसम्मत” और “माफिया पर सीधी कार्रवाई” बताया।
सत्तापक्ष का कहना था कि—
“बिहार में बुलडोजर केवल उन जगहों पर चल रहा है जहां कार्रवाई कोर्ट के आदेश के तहत की जा रही है। विपक्ष अनावश्यक भ्रम फैला रहा है।”
तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी पर सदन में हंगामा
शीतकालीन सत्र के दौरान सबसे अधिक चर्चा में रहा मुद्दा था—तेजस्वी यादव का सदन में न आना।
जैसे ही स्पीकर प्रेम कुमार ने सदन में तेजस्वी का नाम पुकारा और वे मौजूद नहीं थे, एनडीए विधायकों ने जोरदार “शेम-शेम” के नारे लगाए। तेजस्वी की यह लगातार गैरमौजूदगी विपक्ष की असहजता और सत्तापक्ष के हमलावर रुख का कारण बनी रही।
विधान परिषद में राबड़ी देवी की अगुवाई में विपक्ष का वॉकआउट
विधान परिषद में भी माहौल गरम रहा। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की अगुवाई में विपक्षी दलों ने सीएम नीतीश कुमार के संबोधन से पहले ही वॉकआउट कर दिया।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि—
“सदन में विपक्षी विधायकों को बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा है।”
इस वॉकआउट के बाद सियासी तेवर और तेज़ हो गए।
वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव का राजद पर सीधा हमला
सदन के अंतिम दिन बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने राजद और उसके संस्थापक लालू प्रसाद यादव पर सीधा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि—
“विकास कार्यों में वर्षों की देरी और पिछड़ापन पिछली सरकारों की देन है। आज जब विकास हो रहा है, तब भी विपक्ष झूठा प्रचार कर रहा है।”
स्पीकर ने किया सत्र का औपचारिक समापन
स्पीकर प्रेम कुमार ने शीतकालीन सत्र का औपचारिक समापन किया और सभी सदस्यों को नए वर्ष की अग्रिम शुभकामनाएँ दीं।
18वीं विधानसभा का यह शीतकालीन सत्र पक्ष–विपक्ष की लगातार तकरार के बावजूद शांतिपूर्वक सम्पन्न हुआ।
पूरक बजट: तेजस्वी की जगह आलोक मेहता ने संभाला मोर्चा
पूरक बजट पर बहस के दौरान राजद विधायक और पूर्व मंत्री आलोक मेहता ने सरकार पर वित्तीय अव्यवस्था का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि—
“यह कोरोना काल नहीं कि एक ही वित्तीय वर्ष में दूसरा बजट पेश किया जाए। यह सरकार की योजनाओं पर असंगठित कार्य प्रणाली का परिणाम है।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि योजनाएँ समय पर पूरी नहीं होतीं, जबकि ठेकेदारों के दबाव में बजट बढ़ा दिया जाता है।
साथ ही उन्होंने महिला रोजगार कार्यक्रम की उपयोगिता और परिणामों पर भी सवाल उठाए।
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने रखा अपने मंत्री कार्यकाल का पहला प्रस्ताव
सदन में पहली बार मंत्री बने दीपक प्रकाश (उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र) ने निर्वाचन विभाग से जुड़ा अपना पहला प्रस्ताव रखा। इसके बाद वित्त विभाग के प्रस्तावों पर विस्तृत बहस शुरू हुई।
सभी दलों को उनके अनुसार समय आवंटित किया गया—
- बीजेपी: 33 मिनट
- जदयू: 31 मिनट
- राजद: 9 मिनट
- कांग्रेस: 2 मिनट
- AIMIM: 2 मिनट
इस दौरान एक दिलचस्प पल भी आया जब स्पीकर प्रेम कुमार ने प्रभारी मंत्री विजय चौधरी को कई विभागों के प्रस्ताव पेश करते देखते हुए मुस्कुराते हुए उन्हें अनुमति दी।
तेजस्वी पर निजी जीवन से जुड़े आरोप — आलोक मेहता बोले, “निजता में दखल ठीक नहीं”
तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति को लेकर जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने दावा किया कि तेजस्वी कुछ विशेष लोगों के साथ बाहर गए हैं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राजद विधायक आलोक मेहता ने कहा—
“किसी के निजी जीवन में तांक-झांक करना उचित नहीं। हर व्यक्ति अपनी निजी जिंदगी जीने का हकदार है। सरकार को विकास और गरीबी हटाने पर ध्यान देना चाहिए।”


