“अनंत सिंह समेत कुछ विधायकों ने शपथ नहीं ली, प्रोटेम स्पीकर ने कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित की”

बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र का पहला दिन आज संपन्न हुआ, लेकिन कार्यवाही कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। पहले दिन सभी नव निर्वाचित विधायकों ने शपथ ग्रहण किया, लेकिन कुछ सदस्य उपस्थित नहीं थे। प्रोटेम स्पीकर ने कहा कि शेष बचे हुए सदस्यों को मंगलवार को शपथ दिलाया जाएगा


अनंत सिंह कल शपथ लेंगे

मोकामा से बहुचर्चित बाहुबली नेता और विधायक अनंत सिंह भी उन नवनिर्वाचित सदस्यों में शामिल हैं, जिन्होंने आज शपथ नहीं ली। अनंत सिंह फिलहाल बेऊर जेल में बंद हैं। सूत्रों का कहना है कि अनंत सिंह पैरोल पर बाहर आकर शपथ ग्रहण कर सकते हैं और अगले 4 दिनों तक सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकते हैं।


गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि

अक्टूबर 2025 में चुनाव प्रचार के दौरान पटना के टाल इलाके में अनंत सिंह के समर्थकों और अन्य प्रत्याशियों के बीच झड़प हुई, जिसमें दुलारचंद यादव की हत्या हो गई। मृतक के परिजनों ने अनंत सिंह को नामजद किया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर बेऊर जेल में भेज दिया

निचली अदालत ने 20 नवंबर को उनकी जमानत याचिका खारिज की। इसके बावजूद अनंत सिंह का राजनीतिक प्रभाव कायम रहा। उनके समर्थकों ने चुनाव प्रचार किया और उन्होंने जेल में रहते हुए राष्ट्रीय जनता दल की उम्मीदवार वीणा देवी को बड़े अंतर से हराकर जीत दर्ज की।


जेल में रहते हुए दूसरी बार चुनाव में जीत

यह दूसरी बार है जब अनंत सिंह जेल में रहते हुए विधानसभा चुनाव जीत रहे हैं। 2020 में भी जेल में रहते हुए चुनाव जीता था। उस बार उन्हें पैरोल पर सदन में आकर शपथ ग्रहण करना पड़ा था। बाद में कोर्ट ने उन्हें सजा सुनाई थी और उनकी विधायकी रद्द कर दी गई थी।

फिलहाल अनंत सिंह जेल में हैं, लेकिन उन पर कोर्ट से सजा नहीं दी गई है और चार्जशीट भी नहीं दायर हुई है। माना जा रहा है कि उन्हें पैरोल पर शपथ लेने के लिए बाहर लाया जाएगा और शपथ लेने के बाद उन्हें जेल वापस भेजा जाएगा।


शपथ लेने का कानूनी प्रावधान

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 188 के तहत किसी भी विधायक को अपना पद ग्रहण करने से पहले राज्यपाल या उनके प्रतिनिधि के सामने शपथ लेनी होती है।

  • आमतौर पर जेल में बंद विधायक अंतरिम जमानत या पैरोल लेकर सदन में शपथ ग्रहण करते हैं।
  • शपथ ग्रहण के बाद उन्हें वापस जेल लौटना होता है।
  • बहुत दुर्लभ मामलों में अधिकृत अधिकारी जेल जाकर भी शपथ दिला सकता है, लेकिन ऐसी घटनाएं कम ही देखने को मिलती हैं।

 

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