पटना:
बिहार के उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बुधवार को एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि भारत की धरती पर अब कभी भी बाबरी मस्जिद नहीं बन सकती। पश्चिम बंगाल में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखे जाने की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए सिन्हा ने कहा कि “मां भारती की संतान जाग चुकी है, इसलिए अब दुबारा कोई बाबर पैदा नहीं होगा जो भारत में बाबरी मस्जिद खड़ी कर सके।”
विजय सिन्हा का यह बयान राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।
“भारत की धरती पर बाबर का औलाद बाबरी मस्जिद नहीं बना सकता”— विजय सिन्हा
पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान उप मुख्यमंत्री से पूछा गया कि पश्चिम बंगाल में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखने की घोषणा की गई है, इस पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है?
जवाब में विजय सिन्हा ने कहा—
“अब दुबारा कोई बाबर पैदा ही नहीं होगा। मां भारती की संतान जाग चुकी है। भारत में बाबर का औलाद बाबरी मस्जिद नहीं बनाएगा। भारत में भगवान राम और मां जानकी के मंदिर बनेंगे।”
सिन्हा ने कहा कि देश की जनता धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर पहले से कहीं अधिक जागरूक है, इसलिए भारत में अब किसी भी प्रकार के विवादित ढांचे को दोबारा खड़ा करना संभव नहीं है।
बंगाल में बाबरी मस्जिद निर्माण का पोस्टर वायरल
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में मंगलवार देर रात बाबरी मस्जिद शिलान्यास के पोस्टर लगाए जाने के बाद विवाद बढ़ गया है।
पोस्टरों में लिखा है—
- “6 दिसंबर को बेलडांगा में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास समारोह।”
- आयोजक के रूप में टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर का नाम शामिल है।
इसके बाद हुमायूं कबीर के बयान ने राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। उन्होंने मीडिया से कहा—
“6 दिसंबर को हम बाबरी मस्जिद की नींव रखेंगे। इसका निर्माण तीन साल में पूरा होगा। कई मुस्लिम नेता कार्यक्रम में शामिल होंगे।”
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम समुदाय की आस्था के मुद्दे से जुड़ा है और इसे शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा।
राजनीतिक हलचल बढ़ी, बयानबाज़ी तेज
विजय सिन्हा का बयान सामने आते ही राजनीतिक चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है।
एक ओर पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद के शिलान्यास की घोषणा की जा रही है, वहीं दूसरी ओर बीजेपी और एनडीए के नेता इसे भावनात्मक और ऐतिहासिक मुद्दे के रूप में देखते हुए कड़ा विरोध जता रहे हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि—
- यह मुद्दा धार्मिक संवेदनाओं से जुड़ा होने के कारण बेहद संवेदनशील है
- बयानबाज़ी का सीधा प्रभाव आने वाले चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है
- बंगाल और बिहार दोनों राज्यों की राजनीति में इस पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है
6 दिसंबर की तारीख पर भी सवाल— बाबरी विध्वंस दिवस
गौरतलब है कि 6 दिसंबर वही तारीख है, जब 1992 में अयोध्या का विवादित ढांचा ढहा दिया गया था।
इसी दिन पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद के शिलान्यास के पोस्टर लगना स्वतः ही विवाद को जन्म देता है।
सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन इस तारीख को लेकर पहले से ही सतर्क रहते हैं।
इस बीच कार्यक्रम की घोषणा होने के बाद राज्य सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
आगे क्या?
- बंगाल प्रशासन की प्रतिक्रिया अभी आधिकारिक रूप से नहीं आई है
- शिलान्यास कार्यक्रम की कानूनीता पर भी सवाल उठ रहे हैं
- बीजेपी नेताओं ने इसे राजनीतिक तौर पर प्रेरित कदम बताया है
- मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह उनका संवैधानिक अधिकार है
अब 6 दिसंबर का दिन इस मुद्दे को लेकर निर्णायक माना जा रहा है।
राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस घटना के बड़े प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।


