पटना, बिहार — बिहार में नई सरकार का गठन पूरी तरह हो चुका है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐतिहासिक 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, और उनके साथ 26 मंत्रियों ने भी पद एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। विभागों का बंटवारा किया जा चुका है और 25 नवंबर को नई कैबिनेट की पहली बैठक होने जा रही है। इसके बाद विशेष विधानसभा सत्र बुलाया जाएगा, जिसमें 243 नवनिर्वाचित विधायक शपथ लेंगे।
इसी बीच बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल तेजी से उभरकर सामने आया है —
28 हजार वोटों से जीतकर आए JDU के बाहुबली विधायक अनंत सिंह शपथ कैसे लेंगे?
🔹 जेल में हैं अनंत सिंह, जमानत याचिका खारिज
मोकामा से JDU टिकट पर चुनाव जीतने वाले विधायक अनंत सिंह इस समय दुलारचंद यादव हत्या कांड में बेऊर जेल में न्यायिक हिरासत में बंद हैं। हाल ही में उन्होंने पटना सिविल कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने उसे खारिज कर दिया। ऐसे में उनके सामने शपथ ग्रहण की प्रक्रिया सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
🔹 यह पहली बार नहीं — 2020 में भी जेल से जीते थे चुनाव
अनंत सिंह पहली बार जेल के अंदर रहते हुए चुनाव नहीं जीते हैं —
✔ 2020 में भी वे जीत हासिल कर चुके थे
✔ अदालत ने पैरोल देकर उन्हें विधानसभा में शपथ लेने की अनुमति दी थी
इसी कारण माना जा रहा है कि इस बार भी वही प्रक्रिया दोहराई जा सकती है।
उनकी जीत के बाद समर्थकों ने पोस्टरों पर लिखा —
“जेल के ताले टूटेंगे, अनंत भाई छूटेंगे”
जिससे मुद्दा और गर्मा गया है।
🔹 क्या संविधान में ऐसी स्थिति के लिए प्रावधान है?
✔ अनुच्छेद 188 — विधायक को पद ग्रहण करने से पहले राज्यपाल या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी के समक्ष शपथ लेनी होती है।
✔ सामान्य स्थिति में — विधायक विधानसभा परिसर में शपथ लेते हैं
✔ यदि विधायक जेल में हो —
🔹 अदालत पैरोल या अस्थायी जमानत दे सकती है
🔹 बहुत दुर्लभ मामलों में अधिकारी जेल जाकर भी शपथ दिला सकता है
इसलिए अनंत सिंह के मामले में दोनों विकल्प संभव हैं, लेकिन अंतिम अनुमति अदालत और विधानसभा सचिवालय पर निर्भर करेगी।
🔹 सदस्यता बचाने के लिए शपथ अनिवार्य
विधानसभा नियमों के अनुसार —
📌 विधायक के लिए शपथ लेने की कोई निश्चित समय सीमा नहीं
लेकिन
📌 6 महीने तक सदन में उपस्थित न होने पर सदस्यता स्वतः समाप्त हो सकती है
साथ ही —
📌 कोई भी विधायक लगातार 59 दिनों तक बिना अनुमति सदन से अनुपस्थित नहीं रह सकता।
इसलिए अनंत सिंह के लिए 6 महीने के भीतर शपथ लेकर सदन में उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य है।
🔹 अभी दोषी घोषित नहीं — इसलिए चुनाव लड़ना संभव हुआ
अनंत सिंह पर हत्या मामले में मुकदमा चल रहा है, लेकिन —
✔ चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है
✔ न्यायिक हिरासत में हैं, सजा नहीं हुई है
इसलिए कानूनी रूप से वे अयोग्य नहीं माने जाते, और चुनाव लड़ सके।
ध्यान देने योग्य है —
2022 में अवैध हथियार मामले में 10 साल की सजा मिलने पर उनकी विधायकी रद्द हो गई थी, लेकिन 2024 में हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया।
🔹 आगे क्या होगा? — कानूनी लड़ाई तेज होने वाली
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार —
➡ अनंत सिंह पैरोल के लिए नई याचिका दायर कर सकते हैं
➡ पैरोल मंजूर हुआ तो विधानसभा पहुंचकर शपथ लेंगे और तुरंत वापस जेल जाएंगे
➡ पैरोल नहीं मिला तो जेल में अधिकारी द्वारा शपथ दिलाने की संभावना पर विचार हो सकता है
यह फैसला अदालत, राज्य सरकार और विधानसभा सचिवालय की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
🔹 राजनीतिक गलियारों में सबसे चर्चित मुद्दा
नई सरकार के शपथ और विभागों के बंटवारे के बीच भी बिहार की राजनीति में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा इसी सवाल की है —
“अनंत सिंह सदन तक पहुंच पाएंगे या नहीं?”
माने जा रहा है कि —
✔ शपथ की तिथि 25 नवंबर के बाद तय होगी
✔ इसके पहले अनंत सिंह की कानूनी कोशिशें तेज होंगी
✔ अदालत कैसे निर्णय देती है, यही आगे की राजनीति तय करेगा


