पटना, बिहार — बिहार की विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्पाद अधीक्षक अनिल कुमार आजाद के खिलाफ भ्रष्टाचार जांच के तहत पटना, जहानाबाद और औरंगाबाद स्थित चार ठिकानों पर एकसाथ छापेमारी की। यह तलाशी अभियान लगभग 7 घंटे तक चला, जिसमें घर, दस्तावेज़, बैंक खातों और डिजिटल डेटा की गहन जांच की गई। छापेमारी के दौरान नोटों की गिनती के लिए मशीन भी मंगवाई गई, जिससे संकेत मिलता है कि बड़ी मात्रा में नकदी की बरामदगी हुई है।
शिकायत में अनिल आजाद पर 1.58 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप था, लेकिन शुरुआती जांच में 5 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पाए जाने की बात सामने आ रही है।
🔹 छापेमारी में मिली संपत्ति — बैंक निवेश, ज़मीन और ज्वेलरी की जानकारी
SVU के अनुसार तलाशी के दौरान अनिल आजाद और उनकी पत्नी माधुरी देवी के नाम पर कुल 10 प्लॉट मिले। इसके अलावा —
✔ 28 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट
✔ 1.54 करोड़ रुपये का बैंक व बीमा निवेश
✔ 48 लाख रुपये बैंक खातों में
✔ करीब 35 लाख रुपये की सोने-चांदी की ज्वेलरी
बरामद होने का दावा किया गया है।
इसके अलावा 3 बैंक लॉकर भी मिले हैं, जिनकी तलाशी आगे की कार्रवाई के तहत की जाएगी।
🔹 कानूनी धाराओं के तहत जांच जारी
अनिल आजाद पर दर्ज केस —
📌 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) — धारा 13(1)(b) और 13(2)
📌 भारतीय दंड संहिता की धारा 61(2)(a)
के तहत चल रहा है।
SVU का कहना है कि जब्त दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों के मूल्यांकन के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
🔹 रिटायरमेंट से दो महीने पहले कार्रवाई — अनिल आजाद ने साजिश का आरोप लगाया
छापेमारी के समय मौजूद अधिकारी अनिल आजाद ने खुद पर लगे आरोपों को राजनीतिक षड्यंत्र बताया। उनका दावा है कि —
“मैंने औरंगाबाद में 25 अवैध स्प्रिट फैक्ट्रियों को बंद कराया था। इससे स्प्रिट माफिया और कुछ नेताओं की साठगांठ के कारण मुझे फंसाने की कोशिश की जा रही है।”
उन्होंने कहा कि वे पूरी तरह जांच में सहयोग करेंगे और अपनी बेगुनाही साबित करेंगे।
🔹 अनिल आजाद का करियर — चर्चित और विवादों से जुड़ा
✔ मूल निवासी — सुमेरा गांव, जहानाबाद
✔ 1991 में उत्पाद दरोगा के पद पर नियुक्ति
✔ पहली पोस्टिंग — बेतिया
✔ 1999–2002 — पटना में तैनाती, स्प्रिट माफिया असलम खान की पत्नी मुन्नी खातून की गिरफ्तारी से सुर्खियों में आए
✔ बाद में इंस्पेक्टर बनकर — नालंदा, पूर्णिया, मधुबनी, समस्तीपुर और नवादा में तैनाती
✔ पिछले 20 महीनों से औरंगाबाद में उत्पाद अधीक्षक
रिटायरमेंट में मात्र दो महीने शेष हैं, ऐसे में यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बन गया है।
🔹 SVU की कार्रवाई पर प्रशासन और जनता की प्रतिक्रिया
अधिकारियों के अनुसार —
“सरकारी कर्मचारियों की अवैध संपत्ति पर निगरानी रखना और भ्रष्टाचार पर रोक लगाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। SVU की यह कार्रवाई उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।”
राजनीतिक विश्लेषक इस कार्रवाई को बिहार में भ्रष्टाचार नियंत्रण की दृढ़ नीति का संकेत मान रहे हैं।
हालांकि, अनिल आजाद के “साजिश के आरोप” के बाद जांच टीम पर निष्पक्षता से केस साबित करने का दबाव भी बढ़ गया है
अगले चरण में क्या होगा?
📌 बैंक खातों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच
📌 तीन बैंक लॉकरों की तलाशी
📌 संपत्ति का आय स्रोतों से मिलान
📌 आरोप सही पाए जाने पर आगे दंडात्मक कार्रवाई
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संपत्ति वैध आय के अनुरूप है या अवैध संपत्ति के श्रेणी में आती है।


