पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का मतदान और परिणाम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने के बाद अब राजनीतिक दलों के अंदरूनी समीकरण बदलने लगे हैं।
NDA की प्रचंड जीत और भाजपा के सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बाद विपक्षी दलों में हलचल बढ़ गई है। चुनाव के आठ दिन बीतने के बाद भी राजनीतिक साइड इफेक्ट लगातार सामने आ रहे हैं।
NDA की जीत — और विपक्ष में असंतोष
चुनाव परिणाम के अनुसार,
- भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे बड़ी पार्टी बनी
- NDA ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया
- जबकि कई दलों को करारी हार का सामना करना पड़ा
विपक्ष के भीतर आत्ममंथन तेज हो गया है और कई दलों में खुलकर नाराजगी देखने को मिल रही है।
कांग्रेस में खुली बगावत — “प्रदेश अध्यक्ष को हटाओ”
कांग्रेस में चुनावी हार के बाद आंतरिक असंतोष चरम पर है।
कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं ने
- प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम को हटाने की मांग तेज कर दी है
- दो दिन पहले पटना स्थित प्रदेश कार्यालय के सामने धरना भी दिया गया
सूत्रों के अनुसार असंतुष्ट खेमे के नेता दिल्ली जाकर
कांग्रेस हाईकमान से मुलाकात कर प्रदेश अध्यक्ष को हटाने की मांग करेंगे।
असंतुष्ट नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व पर टिकट बेचने तक का आरोप लगाया है।
इस बीच प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति ने 43 नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जो हार के बाद पार्टी के भीतर बढ़ते तनाव को दर्शाता है।
कांग्रेस का प्रदर्शन
इस चुनाव में
- BJP — 89 सीट
- RJD — 25 सीट
- कांग्रेस — 6 सीट
कांग्रेस के लिए ये नतीजे बेहद निराशाजनक रहे हैं, जिसके कारण पार्टी में शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं।
जन सुराज के लिए परिणाम करारी असफलता
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को प्रशांत किशोर और उनकी जन सुराज पार्टी की पहली राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा था।
आक्रामक प्रचार अभियान और प्रशांत किशोर की लोकप्रियता के बावजूद
जन सुराज पार्टी
- 243 में से 238 सीटों पर चुनाव लड़ने के बाद भी एक भी सीट नहीं जीत पाई।
चुनाव हार के तुरंत बाद पार्टी ने
- पंचायत से लेकर प्रदेश स्तर तक की सभी समितियों को भंग कर दिया
- और घोषणा की कि अगले डेढ़ महीने में नया संगठन खड़ा किया जाएगा
राजनीतिक जानकार इसे “हार के बाद रीब्रांडिंग की तैयारी” के रूप में देख रहे हैं।
RJD में भी सन्नाटा — तेजस्वी यादव सार्वजनिक रूप से गायब
महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव चुनाव परिणाम के बाद अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।
इस वजह से विपक्षी दल उन्हें लगातार निशाना बना रहे हैं।
RJD समर्थकों और विपक्षी पार्टियों के बीच तेजस्वी की चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है।


