📍 मधुबनी
कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका देते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. शकील अहमद ने आज प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कहा कि विचारधारा के स्तर पर कांग्रेस से उनका भावनात्मक रिश्ता हमेशा बना रहेगा और “मेरी जिंदगी का आखिरी वोट कांग्रेस को ही जाएगा।”
🔹 टिकट बंटवारे पर नाराजगी — कहा, अनुभवी नेताओं की राय नहीं ली गई
बिहार विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर गहरी नाराजगी जताते हुए डॉ. शकील अहमद ने कहा कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने अनुभवी और पुराने जनप्रतिनिधियों की राय को नजरअंदाज किया, जिसके कारण पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा।
उन्होंने कहा —
“बेनीपट्टी और जाले विधानसभा सीटों के टिकट चयन में हमसे कोई राय या परामर्श नहीं लिया गया। पार्टी की यह कार्यशैली बहुत निराशाजनक है।”
उन्होंने दावा किया कि यदि जनाधार वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की सलाह ली गई होती तो चुनाव परिणाम बेहतर होते।
🔹 व्यक्तिगत बयान — कांग्रेस से विचारधारा का रिश्ता कायम
इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए भी डॉ. अहमद भावुक दिखे और उन्होंने कहा —
“कांग्रेस की सदस्यता छोड़ रहा हूं, लेकिन मेरी आखिरी सांस तक मेरा अंतिम वोट कांग्रेस को ही मिलेगा। कांग्रेस मेरी विचारधारा है और रहेगी।”
उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या यह पार्टी पर दबाव बनाने की रणनीति है या नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत।
🔹 पार्टी के लिए बड़ा झटका
डॉ. शकील अहमद कांग्रेस के
✔ वरिष्ठ नेता
✔ पूर्व केंद्रीय मंत्री
✔ और उत्तर बिहार में मुस्लिम मतदाताओं के बीच प्रभावशाली चेहरा
माने जाते हैं।
ऐसे समय में उनका इस्तीफा पार्टी के लिए नुकसानदेह माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार,
📌 आगामी बिहार राजनीति में यह घटनाक्रम कांग्रेस के भीतर असंतोष और गुटबाज़ी को और उजागर कर सकता है।
🔹 आगे की राजनीतिक दिशा पर सस्पेंस
प्रेस वार्ता के दौरान शकील अहमद ने भविष्य की राजनीतिक योजना पर कुछ स्पष्ट नहीं कहा।
हालांकि उनके समर्थक मानते हैं कि आने वाले दिनों में वे नई राजनीतिक भूमिका या मोर्चे पर सक्रिय हो सकते हैं।


