
बिहार की राजनीति में एक बार फिर नीतीश कुमार का कद मजबूत होता दिखा। मुख्यमंत्री आवास में आयोजित जदयू विधानमंडल दल की बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना गया। इसके तुरंत बाद एनडीए की विधायक दल की बैठक में भी सभी दलों ने एकमत होकर नीतीश कुमार के नाम पर मुहर लगा दी। अब वे गुरुवार को अपने 10वें कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
राजपूत विधायकों की सबसे बड़ी संख्या, चेतन आनंद बने चर्चा का केंद्र
इस बार विधानसभा में सबसे अधिक राजपूत विधायक चुनकर आए हैं। चर्चाओं में सबसे आगे रहे आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद, जो इस बार जदयू के टिकट पर औरंगाबाद जिले के नवीनगर से चुनाव जीते हैं।
जदयू बैठक में शामिल होने पहुंचे चेतन आनंद ने कहा कि नीतीश कुमार का नेता चुना जाना पहले से तय था। उन्होंने दावा किया था कि एनडीए की बैठक में भी नीतीश कुमार ही नेता चुने जाएंगे और वही मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
विपक्ष पर चेतन आनंद का पलटवार
वोट चोरी के आरोपों पर चेतन आनंद ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उनके पास कोई मुद्दा नहीं है।
उन्होंने कहा, “बिहार की जनता ने उन्हें किसी तरह नेता प्रतिपक्ष लायक छोड़ा है। शपथ ग्रहण समारोह बड़े उत्सव जैसा होगा।”
जदयू नेताओं ने दिया विकास का संदेश
फुलवारी शरीफ से जीते जदयू नेता श्याम रजक ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों से जनता के भरोसे पर खरा उतरने और विकास की रफ्तार बढ़ाने को कहा है।
पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव ने भी पुष्टि की कि
“नीतीश कुमार को सर्वसम्मति से नेता चुना गया है। वही मुख्यमंत्री होंगे। गृह मंत्रालय भी उनके पास ही रहेगा।”
मुस्लिम प्रतिनिधित्व घटा—केवल 11 विधायक जीतकर आए
इस बार बिहार विधानसभा में केवल 11 मुस्लिम विधायक जीतकर आए हैं, जो अब तक की सबसे कम संख्या है।
जदयू ने चार मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जबकि लोजपा (रामविलास) ने एक को। इनमें से सिर्फ जमा खान ही जीत हासिल कर पाए।
जमा खान पिछली सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री थे और इस बार भी माना जा रहा है कि उन्हें यह पद दोबारा मिल सकता है। जदयू एमएलसी खालिद अनवर ने कहा—
“जमा खान इस बार भी एनडीए के इकलौते अल्पसंख्यक विधायक हैं, इसलिए उनके मंत्री बनने की संभावना है।”


