राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार के बाद आरजेडी के नेतृत्व पर खुलकर हमला बोला है। तेज प्रताप ने चेतावनी दी कि यदि पार्टी का यही रवैया जारी रहा तो “25 से 5 सीट आने में देर नहीं लगेगी।”
रोहिणी आचार्य के पार्टी और परिवार से नाता तोड़ने के बाद तेज प्रताप ने सीधे अपने छोटे भाई और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि पार्टी से लगातार अपने ही लोगों को बाहर निकाले जाने की प्रक्रिया ने राजद की स्थिति कमजोर कर दी है।
“सबको निकालोगे तो रहेगा कौन?” – तेज प्रताप
तेज प्रताप यादव ने अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल के इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट कर कहा:
“सबको निकालोगे तो रहेगा कौन? यह सवाल सिर्फ मैं नहीं पूछ रहा, बिहार की जनता भी पूछ रही है।”
उन्होंने कहा कि जब उन्हें पार्टी से निकाला गया था, तब किसी ने इसकी गंभीरता नहीं समझी।
तेज प्रताप के अनुसार:
- “सोचा गया कि तेज प्रताप फ़ालतू है, इससे क्या फर्क पड़ेगा। मेरी आवाज़ दबाई गई, मुझे रोका गया।”
- “लेकिन जिस दिन मैंने ‘नई RJD’ की सच्चाई जनता के सामने रखी, उसी दिन इनको पता चल गया कि क्या खोया है।”
तेज प्रताप ने सीटों के आंकड़े भी गिनाए:
- 2015 — 80 सीट
- 2020 — 75 सीट
- 2025 — 25 सीट
उन्होंने कहा कि यह गिरावट जनता बता रही है, और पार्टी को समझने की जरूरत है कि गलती कहाँ हुई।
“पहले मुझे निकाला, फिर मेरी बहन रोहिणी को”
तेज प्रताप ने रोहिणी आचार्य को पार्टी से दूर किए जाने को “गलत और अपमानजनक” बताया।
उन्होंने कहा:
“जिस परिवार ने लोगों को हँसाया-रुलाया, आज वही खुद मज़ाक का पात्र बन गया है। यह राजनीति नहीं, जनता की इज्जत की रक्षा का युद्ध है।”
“अगली बार 25 से 5 सीट होने में देर नहीं लगेगी”
तेज प्रताप यादव ने दावा किया कि यदि वे चुनाव के दौरान पूरे बिहार में घूमते तो आरजेडी इस बार ही 5 सीटों पर सिमट जाती।
उन्होंने कहा:
- “हम 44 सीटों पर लड़े, वहाँ आरजेडी को सिर्फ 5 सीट मिली।”
- “अब जनता समझ चुकी है कि RJD, लालू जी की विचारधारा वाली पार्टी नहीं रही। यह चापलूसों और जयचंदों द्वारा हथियाई गई पार्टी बन चुकी है।”
“राजनीति कुर्सी की नहीं, चरित्र की होती है”
तेज प्रताप ने कहा कि वे कभी किसी को पार्टी से निकालने के पक्ष में नहीं थे, बल्कि उन्हें ही अपने घर और अपने लोगों से दूर कर दिया गया। लेकिन जनता ने उन्हें सुना और उनका समर्थन दिया।
उन्होंने अंत में लिखा:
“आज सवाल यह नहीं है कि पार्टी में कौन रहेगा, बल्कि यह है कि सच के साथ कौन खड़ा है। जवाब वही देगा जिसके पास जनता का प्रेम है, चापलूसों की भीड़ नहीं।”


