रांची/पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत और महागठबंधन की करारी हार के बाद अब राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। इसी क्रम में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने चुनाव परिणाम पर गंभीर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी कटाक्ष किया है।
JMM के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि यह जनादेश नहीं, बल्कि “जनादेश का अपमान” है, और इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया।
“ऐसा जनादेश पहले कभी नहीं देखा”—चुनाव आयोग पर JMM का हमला
सुप्रियो भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा:
“हमने ऐसा जनादेश जीवन में कभी नहीं देखा। यह जनता की भावना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान है। क्या आप लोगों ने कभी ऐसा दृश्य देखा है?”
JMM के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में एक नई हलचल मच गई है। विपक्ष पहले से ही EVM, वोट ट्रांसफर और चुनाव प्रबंधन को लेकर सवाल उठा रहा है, और अब JMM का बयान इसे और हवा दे रहा है।
राजद-कांग्रेस-वाम दलों पर तंज—“दर्द का एहसास नहीं”
सुप्रियो भट्टाचार्य यहीं नहीं रुके। उन्होंने राजद, कांग्रेस और वाम दलों पर भी निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि यह दल आदिवासी, दलित और शोषित समाज के दर्द को समझने में विफल रहे हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा:
“जिन्हें आदिवासी, दलित और शोषित समाज की पीड़ा का अहसास ही नहीं, वे जनता के दिलों में जगह कैसे बनाएंगे?”
उनका यह बयान सीधा संकेत था कि महागठबंधन की रणनीति जमीनी मुद्दों से दूर थी।
महिला मुद्दों के बहाने चुनाव आयुक्त पर सवाल
सुप्रियो ने चुनाव आयोग पर एक और हमला महिलाओं के मुद्दों के बहाने किया।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को स्वतंत्र और पारदर्शी भूमिका निभानी चाहिए, लेकिन इस चुनाव में कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
हालांकि उन्होंने सीधे टिप्पणी किए बिना संकेतों में अपनी बात कही।
“तेजस्वी हारे तो यह मंत्र जपें”—शायराना अंदाज में JMM का कटाक्ष
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने पूछा कि अगर JMM गठबंधन में होता तो क्या परिस्थिति बदल सकती थी?
इस पर सुप्रियो भट्टाचार्य ने हल्के-फुल्के लेकिन तीखे अंदाज में कहा:
“अगर हम गठबंधन का हिस्सा होते तो मजबूती जरूर मिलती। तेजस्वी जी को हेमंत सोरेन का मंत्र ‘हारे का सहारा—हेमंत हमारा’ जपना चाहिए। इससे शायद उनका भला हो जाए।”
उनके बयान पर उपस्थित पत्रकार भी मुस्कुराए, लेकिन यह कटाक्ष राजनीतिक संदेश भी छोड़ गया।
झारखंड में RJD-JMM की दोस्ती, लेकिन बिहार में नहीं बन पाई ‘मीटिंग ग्राउंड’
गौरतलब है कि झारखंड में JMM-राजद-कांग्रेस गठबंधन ने मिलकर चुनाव लड़ा था और सत्ता में भी साझेदारी की।
बिहार चुनाव में भी इस गठबंधन को दोहराने की कोशिश हुई, लेकिन सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बनी, जिससे यह प्रयास विफल हो गया।
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि JMM महागठबंधन का हिस्सा होता, तो कुछ सीटों पर समीकरण बदल सकते थे—but यह महज एक राजनीतिक संभावना है।


