
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए ने महागठबंधन को करारी मात देकर सत्ता में वापसी की है। इस बार के चुनाव में मंत्रियों का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। चुनाव लड़ने वाले कुल 25 मंत्रियों में से 24 मंत्री जीतकर विधानसभा पहुंचे, जो सरकार और गठबंधन की लोकप्रियता को दर्शाता है। केवल एक मंत्री सुमित कुमार सिंह को हार का सामना करना पड़ा, जो चकाई से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरे थे। सुमित कुमार ने 2010 में झारखंड मुक्ति मोर्चा से चुनाव लड़ा था, 2015 में हार गए और 2020 में निर्दलीय जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार उन्हें सफलता नहीं मिली।
भाजपा के लिए भी यह चुनाव बेहद सकारात्मक रहे। पहली बार चुनाव लड़ने वाले भाजपा नेता मंगल पांडेय विजयी रहे। दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने भी जीत हासिल की। सम्राट चौधरी वर्तमान में विधान परिषद के सदस्य हैं और इस बार भाजपा ने उन्हें तारापुर से टिकट दिया था। इससे पहले वह खगड़िया के परबत्ता से दो बार विधायक रह चुके हैं। भाजपा के कुल 15 मंत्रियों ने चुनाव मैदान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और सभी की जीत सुनिश्चित रही।
कृषि मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार ने गया टाउन सीट लगातार आठवीं बार जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया। वहीं जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री बिजेंद्र यादव (सुपौल) ने भी लगातार आठवीं बार जीत दर्ज की। उनकी यह लगातार जीत उनके क्षेत्रों में मजबूत जनाधार और कार्यों के प्रति जनता के विश्वास को दर्शाती है।
जदयू के लिए भी नतीजे अत्यंत संतोषजनक रहे। पार्टी के चुनाव लड़ने वाले सभी 11 मंत्री विजयी रहे। इनमें विजय कुमार चौधरी, बिजेंद्र प्रसाद यादव, श्रवण कुमार, लेशी सिंह, मदन सहनी, महेश्वर हजारी, शीला कुमारी, सुनील कुमार, जयंत राज, मोहम्मद जमाखान और रत्नेश सदा शामिल हैं। जदयू और भाजपा मंत्रियों की यह मजबूत जीत सरकार की स्थिरता और आगामी कार्यकाल में योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की क्षमता का संकेत देती है।
यह प्रदर्शन दर्शाता है कि जनता ने पिछले कार्यकाल में मंत्रियों द्वारा किए गए कार्यों को सराहा है और उन्हें एक बार फिर अवसर देने का निर्णय लिया है। मंत्रियों की लगातार जीत और रिकॉर्ड प्रदर्शन एनडीए की संगठनात्मक मजबूती और चुनावी रणनीति की सफलता को भी उजागर करता है।


