पटना/मनेर। पहले चरण के मतदान के दौरान मनेर विधानसभा क्षेत्र में उस समय माहौल गर्म हो गया, जब आरजेडी विधायक व प्रत्याशी भाई वीरेंद्र की पुलिस अधिकारियों से तीखी नोकझोंक हो गई। विवाद तब शुरू हुआ जब एक दारोगा ने उनकी गाड़ी की जांच करने की कोशिश की, जिस पर भाई वीरेंद्र भड़क उठे। उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी तिवारी से कहा— “ऐ तिवारी, तुमको चेक करने का अधिकार कौन दिया रे…”
इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है और राजनीतिक गलियारों में बड़ी चर्चा का विषय बन गया है।
बयानबाज़ी तेज, दोनों पक्ष में आरोप-प्रत्यारोप
घटना के बाद आरजेडी नेताओं ने सुरक्षाकर्मियों की कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुए इसे “चुनाव प्रभावित करने का प्रयास” बताया।
वहीं विपक्षी दलों ने इस पूरे घटनाक्रम को “राजनीतिक नौटंकी” करार दिया है। दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप की बौछार जारी है।
मतदान केंद्रों पर पहुंचने वाले स्थानीय लोगों ने बताया कि सुबह कुछ बूथों पर भीड़ अधिक थी और लाइनों में समय लग रहा था, लेकिन दोपहर तक सारी व्यवस्था सामान्य हो गई।
मनेर सीट का राजनीतिक महत्व
पटना जिले की मनेर विधानसभा सीट हमेशा से हाई-प्रोफाइल मानी जाती रही है। बाहुबली छवि, स्थानीय समीकरण और जातीय फैक्टर यहां के चुनावों में अहम भूमिका निभाते हैं।
इसी वजह से इस सीट पर हर बार मुकाबला बेहद दिलचस्प रहता है।
2020 का नतीजा: भाई वीरेंद्र की बड़ी जीत
पिछले विधानसभा चुनाव में (2020) आरजेडी उम्मीदवार भाई वीरेंद्र ने बीजेपी के निखिल आनंद को 32,917 वोटों के भारी अंतर से हराकर जीत दर्ज की थी।
इस बार भी मनेर में आरजेडी और एनडीए के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है, और दोनों ही दल इस सीट को जीतकर पटना की राजनीतिक साख मजबूत करने की कोशिश में हैं।
मतदाताओं में उत्साह, महिलाओं की रही खास भागीदारी
सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लोगों की लंबी कतारें दिखीं। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों में भारी उत्साह नजर आया।
हालांकि कुछ बूथों पर तकनीकी दिक्कतों और भीड़ के कारण मतदान की गति कुछ देर धीमी रही, लेकिन समय बढ़ने के साथ प्रक्रिया सुचारू होती गई।
आरजेडी के आरोपों से गरमाया माहौल
भाई वीरेंद्र ने आरोप लगाया है कि प्रशासन जानबूझकर उन्हें निशाना बना रहा है और वोटिंग को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
दूसरी ओर प्रशासन का दावा है कि मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराया जा रहा है।
अब इस विवाद की वास्तविकता क्या है, यह चुनाव आयोग की जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगा।


