
भागलपुर/पटना — पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता अश्विनी कुमार चौबे ने पूर्व रेल मंत्री स्वर्गीय ललित नारायण मिश्रा हत्याकांड की दुबारा जांच की मांग तेज कर दी है। चौबे ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे केस में एक हस्तक्षेप आवेदन दाखिल किया है, ताकि साजिश की पूरी परतें एक बार फिर खुलकर सामने आ सकें।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि राष्ट्रहित, लोकशक्ति और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा है। बिहार और मिथिलांचल के लोग वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
क्या है मामला?
2 जनवरी 1975 को समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर एक कार्यक्रम के दौरान बम विस्फोट में तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा की मौत हो गई थी।
हमले में एमएलसी सूर्य नारायण झा और एक रेलवे कर्मचारी भी शहीद हुए थे। शुरुआत में बिहार पुलिस और CID ने जांच की, बाद में केस CBI को ट्रांसफर हुआ।
चौबे ने कही ये बड़ी बातें
प्रेसवार्ता में अश्विनी चौबे ने कहा:
- शुरुआत में गिरफ्तार किए गए लोगों के इकबालिया बयान दर्ज हुए थे
- बाद में जांच का रुख बदल दिया गया
- CID और तारकुंडे आयोग की रिपोर्ट में राजनीतिक साजिश के संकेत
- कई वरिष्ठ नेताओं ने भी सच सामने लाने की मांग की थी
- “साजिश के बड़े नाम बचाने के लिए पूरा केस मोड़ दिया गया”
उन्होंने आरोप लगाया कि केस को दबाने के लिए सिस्टमेटिक प्लानिंग की गई थी।
संसद में भी उठी थी आवाज
चौबे ने कहा कि इस हत्याकांड पर संसद में भी चर्चा हुई थी।
- तत्कालीन गृहमंत्री ने नाम लेकर संदिग्धों का जिक्र किया
- अटल बिहारी वाजपेयी, चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर ने भी सच सामने लाने की मांग की थी
“न्याय के लिए SIT जरूरी”
चौबे ने कहा कि आज भी कई सवाल अनुत्तरित हैं और यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है।
उन्होंने मांग की —
“सत्य सामने लाने के लिए SIT बैठाकर निष्पक्ष जांच कराई जाए। यह बिहार और मिथिला के करोड़ों लोगों की भावनाओं का मामला है।”
अगली सुनवाई 11 नवंबर को है। चौबे ने उम्मीद जताई कि कोर्ट सच्चाई को सामने लाने में मदद करेगा।
कौन थे ललित नारायण मिश्रा?
भारत के वरिष्ठ नेता, तीन बार सांसद और कई मंत्रालयों में जिम्मेदारी निभाने वाले मिश्रा 1973 में रेल मंत्री बने थे। उनका योगदान भारतीय रेल और व्यापार नीति को नयी दिशा देने में अहम माना जाता है।


