पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए महागठबंधन में सीट बंटवारे की जटिल स्थिति जारी है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस अपनी पसंद की सीट नहीं मिलने पर समानुपातिक सीट घटाने पर अड़ गई है। यह मुद्दा महागठबंधन में सीट बंटवारे की गुत्थी न सुलझने का बड़ा कारण बन गया है।
कांग्रेस पहले 55 सीटों के आसपास समझौते के लिए तैयार थी, लेकिन इसके एवज में पार्टी अपनी मनपसंद सीट चाह रही थी। वहीं, राजद ने कांग्रेस की परंपरागत सीटों पर अपना दावा ठोक दिया। इसमें कहलगांव, राजापाकर, वैशाली प्रमुख हैं। राजद की मांग के जवाब में कांग्रेस ने सीमांचल की कुछ अतिरिक्त सीटों की मांग कर दी।
मामला उलझता देख अब इसे दिल्ली दरबार तक ले जाया गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, महागठबंधन में घटक दलों की संख्या बढ़ने के कारण कांग्रेस और राजद दोनों को कुछ त्याग करना होगा। वहीं, वीआईपी और वामदल भी अपनी सीट संख्या बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
महागठबंधन समन्वय समिति के समक्ष कांग्रेस ने नया फार्मूला सुझाया है। इसके अनुसार, जितनी प्रतिशत सीट कांग्रेस छोड़ेगी, उतनी ही राजद को भी छोड़नी होगी। यदि कांग्रेस की सीट संख्या घटती है, तो पार्टी को मनपसंद सीट देने का प्रावधान होगा।
इस बीच, एनडीए के घटक दलों के बीच रविवार को सीटों की साझेदारी पूरी हो गई। अब यह तय है कि किस दल को कौन-सी सीट मिलेगी और कहां से उनके प्रत्याशी खड़े होंगे। इसकी औपचारिक घोषणा सोमवार को होने की संभावना है, जिसके बाद प्रत्याशियों के नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।


