भागलपुर: कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अजीत शर्मा लगातार चौथी बार भागलपुर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि पार्टी की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन उन्हें संभावित उम्मीदवार के तौर पर माना जा रहा है। इस खबर से अजीत शर्मा के समर्थकों में उत्साह का माहौल है, वहीं कांग्रेस के लिए अपनी सीट बचाना चुनौतीपूर्ण भी साबित होगा।
उपचुनाव से शुरू हुई सफलता की कहानी
2014 लोकसभा चुनाव में अश्विनी चौबे की बक्सर से जीत के बाद भागलपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ। इस उपचुनाव में अजीत शर्मा ने कांग्रेस के लिए वापसी करते हुए जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा के नभय चौधरी को 17,229 वोटों के अंतर से हराया। अजीत को इस चुनाव में कुल 63,753 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 46,524 वोट ही मिले।
लगातार दूसरी बार 2015 में जीत
2015 के विधानसभा चुनाव में अजीत शर्मा ने फिर से कांग्रेस की झोली में जीत दिलाई। उन्होंने भाजपा के अर्जित शाश्वत चौबे को 10,658 वोटों के अंतर से हराया। इस बार अजीत को कुल 70,514 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 59,856 वोटों पर संतोष करना पड़ा।
तीसरी बार 2020 में मिली जीत
2020 के विधानसभा चुनाव में अजीत शर्मा ने तीसरी बार सफलता हासिल की। इस बार उनके सामने भाजपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष रोहित पांडेय थे। अजीत शर्मा ने बेहद रोमांचक मुकाबले में केवल 1,113 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। अजीत को 65,502 वोट मिले, जबकि रोहित पांडेय को 64,389 वोट ही प्राप्त हुए।
निरंतर सफलता से कांग्रेस को मिला भरोसा
भागलपुर में लगातार जीत दर्ज करने वाले अजीत शर्मा की राजनीतिक पकड़ मजबूत मानी जाती है। 19 साल बाद विधानसभा में कांग्रेस की वापसी के बाद उनकी लगातार जीत ने पार्टी के लिए विश्वास और आत्मबल बढ़ाया है।
आगामी चुनाव में चुनौती
अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं होने के बावजूद अजीत शर्मा को पार्टी का संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की चुनौती और कांग्रेस के लिए सीट को बरकरार रखना इस चुनाव को और रोमांचक बना सकता है।


