पटना, 10 अक्टूबर 2025:बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर 10 अक्टूबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी तक दोनों प्रमुख गठबंधनों में सीट बंटवारा फाइनल नहीं हुआ है।
इस बार मामला छोटा-बड़ा दलों की वजह से लंबित रहा और NDA के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी है चिराग पासवान को मनाना।
सेंट्रल पार्लियामेंटरी बोर्ड की बैठक अहम
सूत्रों के अनुसार, अंतिम फैसला सेंट्रल पार्लियामेंटरी बोर्ड की बैठक में किया जाएगा। यह बैठक चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के साथ अंतिम समझौते की दिशा तय करेगी।
केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने पिछले कुछ दिनों में चार बार चिराग पासवान से बैठक कर सीट बंटवारे और उम्मीदवारों के मसले पर बातचीत की है।
बैठक का मकसद केवल सीटों का बंटवारा तय करना नहीं है, बल्कि गठबंधन के भीतर हर छोटी-बड़ी विवादास्पद मांग और समझौते का अध्ययन करना भी है। इसके अलावा, यह बैठक NDA की रणनीति को अंतिम रूप देने और चुनाव प्रचार के लिए रोडमैप तैयार करने का भी मंच होगी।
चिराग पासवान की भूमिका
चिराग पासवान इस बैठक में अपनी पार्टी की मांगों को मजबूत तरीके से रखेंगे। पिछली बार 2020 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने JDU और BJP के खिलाफ कई सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिससे NDA को नुकसान हुआ था।
इस बार चिराग पासवान अपनी लोकसभा चुनाव 2024 में शानदार प्रदर्शन को आधार बनाकर महत्वपूर्ण सीटों की मांग पर अड़े हैं, जिसमें कुछ ऐसी सीटें शामिल हैं जहां से JDU और बीजेपी लगातार जीतते आए हैं।
बैठक का राजनीतिक महत्व
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बैठक का परिणाम सीधे चुनावी समीकरण और गठबंधन की ताकत को प्रभावित करेगा।
यदि चिराग पासवान संतुष्ट होते हैं, तो NDA को 2020 वाला नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। वहीं, बैठक में कोई ठोस समझौता न हुआ, तो गठबंधन के अंदर दरार की संभावना भी बनी रहेगी।
सूत्रों के अनुसार, बैठक के बाद ही NDA में सीट बंटवारे का ऐलान किया जाएगा और इसके बाद उम्मीदवारों की अंतिम सूची पर मुहर लगाई जाएगी।


