बिहार में 19 वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन में 192% से अधिक की वृद्धि

मक्का उत्पादन में बिहार को मिली ऐतिहासिक सफलता, इथेनॉल नीति से किसानों को फायदा

पटना, 30 सितंबर।बिहार सरकार के लगातार प्रयासों और कृषि विकास योजनाओं के चलते पिछले 19 वर्षों में राज्य में खाद्यान्न उत्पादन में 192 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2004-05 में राज्य का कुल खाद्यान्न उत्पादन 79.06 लाख मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 231.15 लाख मीट्रिक टन हो गया। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ी है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।


प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि

खाद्यान्न की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता वर्ष 2004-05 में 12.11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी, जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 33.86 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गई।

  • चावल: उत्पादन 26.25 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 95.23 लाख मीट्रिक टन, प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 14.15 से 30.62 क्विंटल
  • गेहूं: उत्पादन 32.79 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 73.07 लाख मीट्रिक टन, प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 16.22 से 32.11 क्विंटल
  • मक्का: उत्पादन 14.91 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 58.65 लाख मीट्रिक टन, प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 23.79 से 61.38 क्विंटल

मक्का उत्पादन में ऐतिहासिक रिकॉर्ड

मक्का के उत्पादन में 293 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इथेनॉल उत्पादन नीति के लागू होने के कारण मक्का के क्षेत्रफल में भी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2004-05 में मक्का का रकबा 6.27 लाख हेक्टेयर था, जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 9.55 लाख हेक्टेयर हो गया है।

वर्तमान में राज्य में 17 इथेनॉल इकाइयां कार्यरत हैं, जिससे मक्का किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिल रहा है।


बिहार को पांच कृषि कर्मण पुरस्कार भी मिले

इन उपलब्धियों के लिए बिहार को पांच कृषि कर्मण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। भारत सरकार ने वर्ष 2011-12 में चावल, 2012-13 में गेहूं, 2015-16 और 2016-17 में मक्का तथा 2017-18 में गेहूं के उत्पादन एवं उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए बिहार को ये पुरस्कार प्रदान किए।


 

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