टीबी मरीजों के खातों में पोषण आहार के लिए चार करोड़ का भुगतान, बी-पाल रेजिमेन से एमडीआर मरीजों का इलाज छह महीने में संभव

पटना, 26 सितंबर 2025: राजधानी पटना में टीबी (Tuberculosis) को जड़ से समाप्त करने की मुहिम में इस वित्तीय वर्ष में अब तक लगभग चार करोड़ रुपये टीबी मरीजों के खातों में निक्षय पोषण योजना के तहत पोषण सहायता के रूप में भेजे जा चुके हैं। यह राशि सीधे मरीजों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है, ताकि उन्हें समय पर पोषण सहायता मिल सके और इलाज के दौरान उनका स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।

सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने बताया कि टीबी मरीजों को प्रति माह 1,000 रुपये की दर से छह महीने तक पोषण सहायता दी जा रही है। वहीं, मल्टी-ड्रग रेसिस्टेंस (एमडीआर) वाले मरीजों को उनकी जरूरत के अनुसार अधिक राशि उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि राजधानी के सभी अस्पतालों में मरीजों को शत-प्रतिशत दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे टीबी मरीजों की रिकवरी रेट काफी बेहतर हो गई है।

बी-पाल रेजिमेन विधि से एमडीआर मरीजों का छह महीने में इलाज

सिविल सर्जन ने बताया कि मई 2025 से राजधानी में बी-पाल रेजिमेन पद्धति के तहत एमडीआर टीबी मरीजों का इलाज शुरू किया गया है। इस पद्धति से पहले एमडीआर मरीजों का इलाज लगभग 18 महीने में होता था, लेकिन अब यह केवल छह महीने में संभव हो पा रहा है।

इस योजना के तहत करीब 160 एमडीआर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि जो मरीज बीच में दवा लेना छोड़ देते हैं, वे एमडीआर श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा एमडीआर मरीजों के संपर्क में आने वाले अन्य मरीज भी इस श्रेणी में शामिल हो जाते हैं।

डॉ. सिंह ने बताया कि बी-पाल रेजिमेन विधि के लागू होने से मरीजों की रिकवरी रेट में भी काफी सुधार हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य मरीजों का इलाज तेज और प्रभावी ढंग से करना है ताकि टीबी के मरीज जल्दी ठीक होकर अपने परिवार और समाज में स्वस्थ जीवन जी सकें।

सिविल सर्जन का संदेश: “टीबी के मरीज समय पर दवा और पोषण सहायता लें, ताकि इलाज सफल हो और बीमारी पूरी तरह जड़ से खत्म हो सके। सरकारी सहायता का लाभ सभी पात्र मरीजों तक पहुँचाना हमारी प्राथमिकता है।”


 

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