80 साल के बुजुर्ग दंपति की अपील पर अहम निर्णय
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने माता-पिता के भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाने में बच्चों की असफलता के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि बच्चे अपने माता-पिता का ख्याल नहीं रखते, तो उन्हें उनकी संपत्ति से बेदखल किया जा सकता है।
मामले का संक्षिप्त विवरण
- यह निर्णय 80 वर्षीय बुजुर्ग और 78 वर्षीय उनकी पत्नी की अपील पर आया।
- बुजुर्ग दंपति ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके बड़े बेटे के खिलाफ बेदखल करने का न्यायाधिकरण आदेश अमान्य कर दिया गया था।
- सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि भरण-पोषण की जिम्मेदारी का पालन न करने वाले बच्चों के खिलाफ सख्त कदम उठाया जा सकता है।
कोर्ट का प्रमुख तर्क
- माता-पिता का भरण-पोषण करना बच्चों की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है।
- यदि यह जिम्मेदारी निभाई नहीं जाती, तो संपत्ति से बेदखली सहित अन्य कानूनी कदम उठाने का अधिकार माता-पिता को है।
- सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले से समाज में बुजुर्गों के अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत करने का संदेश दिया।
विशेष टिप्पणी
विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला बुजुर्गों के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा अधिकारों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। अब बच्चे अपने माता-पिता की देखभाल में अनदेखी नहीं कर पाएंगे, और न्यायिक हस्तक्षेप से उनका हक सुरक्षित रहेगा।


