मुख्यमंत्री हरित कृषि संयंत्र योजना: किसानों तक पहुंच रहे आधुनिक कृषि यंत्र

पटना, 24 सितंबर 2025 – बिहार सरकार की “मुख्यमंत्री हरित कृषि संयंत्र योजना” ने राज्य के लघु और सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि यंत्र पहुँचाने का मार्ग आसान बना दिया है। योजना के तहत प्रत्येक पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समिति) में कृषि उपकरण बैंक स्थापित किया गया है, जिससे किसान कम लागत में आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।


योजना की मुख्य बातें

  • कृषि उपकरण बैंक:
    पैक्सों में किसानों के लिए ट्रैक्टर, थ्रेशर, रीपर, मल्टी क्रॉप थ्रेसर, लेजर लेवलर, रोटरी मुल्चर, स्ट्रॉ बॉलर जैसे यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
  • वित्तीय सहायता:
    प्रत्येक पैक्स को कृषि यंत्रों के क्रय हेतु कुल 15 लाख रुपये उपलब्ध कराए जाते हैं। इसमें 50% राशि ऋण (ब्याज सहित) और 50% राशि अनुदान के रूप में दी जाती है।
  • कितनी मदद:
    अब तक बिहार में 2973 पैक्सों को कुल 16,315 आधुनिक कृषि यंत्र वितरित किए जा चुके हैं।
  • किसानों के लिए सुविधा:
    किसान अब पैक्सों द्वारा ऑन-लाइन या ऑफ-लाइन बुकिंग कर यंत्रों का उपयोग कर सकते हैं। पैक्स “पहले आओ, पहले पाओ” प्रणाली के आधार पर सेवा प्रदान कर रहे हैं।
  • पारदर्शिता और रिकॉर्ड:
    पैक्सों को निर्देशित किया गया है कि वे यंत्रवार लॉगबुक, किराया बुकिंग, प्राप्ति पंजी, परिसंपत्ति पंजी और मरम्मत पंजी को नियमित रखें। इससे किसानों को भरोसा मिलेगा और पैक्स की आय का सही लेखा-जोखा तैयार होगा।

मंत्री डॉ. प्रेम कुमार का संदेश

सहकारिता विभाग के मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा,
“मुख्यमंत्री हरित कृषि संयंत्र योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार की महत्वाकांक्षी पहल है। यह योजना हर खेत तक आधुनिक यंत्र पहुँचाकर खेती को लाभकारी बना रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है।”


पर्यावरण और तकनीक की प्राथमिकता

योजना में आधुनिक यंत्रों के चयन में पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता को भी प्राथमिकता दी जा रही है। किसानों को कृषि यंत्र कम किराये पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसान भी आधुनिक तकनीक का लाभ उठा पा रहे हैं।


निष्कर्ष:
मुख्यमंत्री हरित कृषि संयंत्र योजना बिहार के किसानों के लिए आधुनिक कृषि उपकरणों तक सुलभ पहुँच, कम लागत और पारदर्शिता सुनिश्चित कर रही है। इससे किसानों की उत्पादकता बढ़ेगी और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।


 

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