पटना, 23 सितंबर 2025: राज्य में खरीफ धान की रोपनी के दौरान किसानों को खरपतवारनाशी रसायनों का सही उपयोग करने की सलाह दी गई है। कृषि विभाग ने कहा कि फसल की अच्छी पैदावार के लिए खेत से समय पर खरपतवार हटाना जरूरी है।
किसानों के लिए मुख्य निर्देश
- हवा शांत और साफ मौसम में ही खरपतवारनाशी का छिड़काव करें।
- भूमि में पर्याप्त नमी होनी चाहिए।
- छिड़काव के लिए फ्लैट फैन या फ्लड जेट नोजल का ही उपयोग करें।
- धान की फसल में सामान्यतः दो बार निकाई-गुड़ाई की आवश्यकता होती है:
- पहली: बुआई/रोपनी के 20-25 दिन बाद
- दूसरी: 40-45 दिन बाद
खरपतवारनाशी रसायनों का उपयोग
- पेंडीमेथिलीन 30% ईसी – प्री-इमरजेन्स, 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर, बुआई के 3-5 दिन में, 600-700 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव।
- बूटाक्लोर 50% ईसी – रोपनी के 2-3 दिन में, 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर, 600-700 लीटर पानी या 50-60 किग्रा सूखे बालू में मिलाकर भुड़काव।
- प्रेटिलाक्लोर 50% ईसी – रोपनी के 2-3 दिन में, 1.25 लीटर प्रति हेक्टेयर, 600-700 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव।
- ऑक्सीफ्लोरफेन 23.5% ईसी – 650-1000 मिली प्रति हेक्टेयर, सीधी बुआई में 3-5 दिन के भीतर।
- पाइराजोसल्फॉन ईथाइल 10% डब्लूपी – रोपनी के 8-10 दिन में, 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर, 600-700 लीटर पानी में घोल बनाकर या बालू में मिलाकर छिड़काव।
- विस्पाइरी बैंक सोडियम 10% एसएल – पोस्ट-इमरजेन्स, 200 मिली प्रति हेक्टेयर, बुआई/रोपनी के 15-20 दिन में 700-800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव।
कृषि विभाग ने किसानों से अनुरोध किया है कि अनुशंसित मात्रा और समय का पालन करें ताकि धान की फसल सुरक्षित रहे और अधिक पैदावार प्राप्त हो सके।


