
समय पर टीकाकरण, साफ-सफाई और हरे चारे का सही प्रबंधन जरूरी
पटना, 23 सितंबर।पशुपालकों को सितंबर माह में अपने पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने इस माह में होने वाली बीमारियों और संक्रमण से बचाव के लिए कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
विभाग ने बताया कि इस मौसम में गलघोटू और लंगड़ी बुखार के फैलने की संभावना अधिक रहती है। ऐसे में पशुपालकों को समय रहते पशुओं को टीका लगवाना चाहिए और किसी भी बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर पशु चिकित्सक से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
विभाग की प्रमुख सलाह
- इस माह में चारे के संग्रहण पर ध्यान दें। हरे चारे से साइलोज बनाएं या हरे और सूखे चारे को मिलाकर दें।
- मक्का, नेपियर, गिनी घास, ज्वार और सूडान जैसी फसलें हरे चारे के रूप में अधिक उपयोगी हैं।
- हरे चारे के अधिक सेवन से दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए पशुओं को बार-बार खुले में चरने के लिए न भेजें।
- चारे के साथ नमक का मिश्रण देना लाभकारी रहेगा।
साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव
- चारागाह और बाड़ों की नियमित सफाई और कीटाणुनाशक दवा का छिड़काव करें।
- बरसाती घास न खिलाएं और गढ्ढों, तालाब या पोखरों का पानी न पिलाएं।
- लंगड़ी रोग से बचाव के लिए स्वस्थ पशुओं को दूषित भूमि और चारागाह से अलग रखें।
- पशुओं का आहार पौष्टिक और स्वादिष्ट होना चाहिए।
विभाग ने कहा कि इन उपायों को अपनाकर पशुपालक अपने पशुओं को बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं और उत्पादन क्षमता में भी सुधार कर सकते हैं।


