शहद उत्पादन में बिहार बना देश का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य

वार्षिक 18,030 मीट्रिक टन उत्पादन, सरकारी अनुदान और प्रशिक्षण से बढ़ी मधुमक्खी पालन की संख्या

पटना, 23 सितंबर।बिहार ने पिछले 20 वर्षों में शहद उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की है। 2005 से पहले जहां राज्य में सीमित मात्रा में शहद का उत्पादन होता था, वहीं अब वर्ष 2023-24 में 18,030 मीट्रिक टन से अधिक शहद का उत्पादन हुआ है। इसी के साथ बिहार देश में शहद का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य बन गया है।

राज्य में शहद उत्पादन बढ़ने से हजारों लोगों को रोजगार मिला है और उनकी जीवनशैली में सुधार आया है। सरकारी योजनाओं के प्रोत्साहन, वनस्पति विविधता, अनुकूल जलवायु और प्राकृतिक संसाधनों के सही इस्तेमाल से शहद का उत्पादन लगातार बढ़ा है।

प्रमुख शहद और उत्पादन केंद्र

  • मुजफ्फरपुर, वैशाली और समस्तीपुर: लीची शहद
  • नालंदा और पटना: सरसों शहद
  • औरंगाबाद और रोहतास: तिल का शहद

लीची और सरसों का शहद राज्य में सबसे अधिक लोकप्रिय है और अपने अनोखे स्वाद के कारण देश भर में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

मधुमक्खी पालन पर सरकार का समर्थन

बिहार सरकार और केन्द्र प्रायोजित योजनाओं के तहत मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए:

  • मधुमक्खी बक्सा, छत्ते और शहद निष्कासन यंत्र पर सामान्य कृषकों को 75%, और अनुसूचित जाति एवं जनजाति के कृषकों को 90% तक अनुदान दिया जाता है।
  • परागण बढ़ावा कार्यक्रम के तहत 20 हजार से 1 लाख मधुमक्खी बक्सों का वार्षिक वितरण।
  • शहद उत्पादन और प्रबंधन के प्रशिक्षण भी किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

सरकार की इन पहलों से बिहार में न केवल शहद उत्पादन बढ़ा है, बल्कि राज्य का शहद उच्च गुणवत्ता वाला और पूरे देश में पसंद किया जाने वाला बन गया है।


 

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