बिहार में 36 हजार 757 कि.मी. से अधिक ग्रामीण सड़कों का कायाकल्प

20 हजार करोड़ से बदली सूबे के गांवों की तस्वीर | 16,171 सड़कों में से 15,104 की मरम्मति पूरी

पटना, 26 अगस्त।बिहार में ग्रामीण इलाकों की सूरत तेजी से बदल रही है। खेत-खलिहान से लेकर स्कूल, अस्पताल और बाज़ार तक पहुंचने का सफर अब आसान हो गया है। बिहार ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति-2018 के तहत अब तक 15,104 सड़कों की मरम्मति का काम पूरा कर लिया गया है, जिसकी कुल लंबाई 36,757.22 किलोमीटर है।

इस योजना में राज्यभर की 16,171 ग्रामीण सड़कों (लंबाई 40,259.35 कि.मी.) की मरम्मति का लक्ष्य तय किया गया था। इन पर 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिशा-निर्देश में बनी यह नीति न केवल सड़क बनाने बल्कि उसके लंबे समय तक रख-रखाव पर भी फोकस करती है।

ग्रामीण जीवन में आया बदलाव

इन सड़कों के कायाकल्प से किसानों को अपनी फसल मंडी तक पहुँचाने में आसानी हो रही है। बच्चों को स्कूल आने-जाने में सुविधा मिली है। बीमारों को अस्पताल ले जाना भी अब सहज हो गया है। बाढ़ और प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राहत पहुंचाना भी आसान हो गया है। कुल मिलाकर, ग्रामीण सड़कों ने लोगों के जीवनस्तर को बेहतर बनाया है।

जिलों में प्रगति

  • पूर्वी चंपारण: 957 सड़कों में से 905 का कायाकल्प (2,384.03 कि.मी.)
  • मुजफ्फरपुर: 718 सड़कों में से 657 की मरम्मति (1,680.45 कि.मी.)
  • पश्चिम चंपारण: 617 में से 597 सड़कें (1,994.23 कि.मी.)
  • सारण: 1,583.90 कि.मी.
  • समस्तीपुर: 1,404.90 कि.मी.
  • गया: 1,370.45 कि.मी.
  • वैशाली: 1,354.41 कि.मी.

इस उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि ग्रामीण विकास की दिशा में बिहार ने लंबी छलांग लगाई है।


 

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