86,000 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक आवंटन, 58% से अधिक महिलाएं जुड़ीं
नई दिल्ली। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ग्रामीण भारत में रोजगार और विकास की एक अहम कड़ी बन चुकी है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इस योजना के तहत 86,000 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे बड़ा आवंटन किया है।
अब तक की उपलब्धियां
- अब तक ₹45,783 करोड़ की राशि जारी।
- 58,826 जॉब कार्ड रद्द कर पारदर्शिता सुनिश्चित।
- देशभर में 290 करोड़ मानव-दिवस सृजित।
- मनरेगा के तहत बने 6.36 करोड़ परिसंपत्तियों की जियो-टैगिंग पूरी।
महिलाओं की अहम भागीदारी
मनरेगा ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।
- महिलाओं की भागीदारी 58.15% तक पहुंची।
- महिलाओं को गांव में ही आजीविका और आत्मनिर्भरता का अवसर।
तकनीकी सुधार और पारदर्शिता
- हर परिसंपत्ति की जियो-टैगिंग अनिवार्य।
- आधार आधारित भुगतान प्रणाली (Aadhaar Based Payment System) लागू।
- फर्जी जॉब कार्डों पर सख्ती से कार्रवाई।
जमीनी असर
असम के एक गांव में मनरेगा से नहर का निर्माण हुआ, जिससे सिंचाई की समस्या खत्म हुई और किसानों की पैदावार दोगुनी हो गई। ऐसे उदाहरण साबित करते हैं कि यह योजना केवल मजदूरी ही नहीं, बल्कि स्थायी विकास की नींव रख रही है।
चुनौतियां
- समय पर मजदूरी भुगतान की समस्या।
- कुछ राज्यों में कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल।
- निगरानी और शिकायत निवारण तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत।
मनरेगा अब सिर्फ एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता और सतत विकास का साधन बन चुका है। आने वाले वर्षों में इसकी भूमिका और भी निर्णायक होगी।


