भागलपुर। मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान भागलपुर में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। यहां पिछले पाँच दशक से रह रही दो पाकिस्तानी महिलाओं ने न सिर्फ भारत में शादी की, बल्कि मतदाता सूची में अपना नाम भी जुड़वा लिया। यही नहीं, इनमें से एक महिला तो सरकारी स्कूल में शिक्षिका भी है।
बिना भारतीय नागरिकता के कैसे बनी वोटर?
जांच में पता चला है कि इन दोनों पाकिस्तानी महिलाओं ने भारतीय नागरिकता हासिल किए बिना ही आधार कार्ड बनवा लिया और मतदाता सूची में नाम दर्ज करा लिया। सवाल यह है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी आखिर कैसे हुई? अब पुलिस उनकी तलाश में जगह-जगह छापेमारी कर रही है, लेकिन दोनों महिलाएं फिलहाल फरार हैं।
गृह मंत्रालय और चुनाव आयोग ने इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। खास बात यह है कि यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए आधार कार्ड को मान्य ठहराया है।

इमराना खातून का केस सबसे चर्चित
इनमें से एक महिला, इमराना खातून उर्फ इमराना खानम, नगर निगम के राजकीय उर्दू मध्य विद्यालय, बरहपुरा (भागलपुर) में शिक्षिका है।
- इमराना 18 जुलाई 2013 से यहां पदस्थापित हैं।
- वह बिहार सरकार के शिक्षा विभाग में 34540 कोटे से नियुक्त हुई थीं।
- पहले नारायणपुर प्रखंड के स्कूल में पदस्थापित रहीं।
निरीक्षण के दौरान पता चला कि वह कई दिनों से स्कूल में नहीं आ रही थीं। प्रधानाध्यापक ने बताया कि वह सिक लीव पर हैं। विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक उनकी ऑनलाइन अटेंडेंस 1 जुलाई 2025 को अंतिम बार दर्ज हुई थी। इसके बाद से उन्होंने मैनुअल तरीके से हाजिरी बनाई।
शैक्षिक रिकॉर्ड भी भारत से
इमराना खातून का शैक्षिक रिकॉर्ड भी भारत से जुड़ा है।
- मैट्रिक: 1983 में एमएन फतेहपुर से
- इंटर: 1989 में एमएम स्कूल से
- डीएलएड: पीटीटीसी भागलपुर से
शिक्षा विभाग में उनकी नियुक्ति 31 जनवरी 2012 को हुई थी।
बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कैसे तीन महीने के वीजा पर भारत आईं पाकिस्तानी महिलाएं यहां शादी करके नागरिकता छिपाकर मतदाता बन गईं? और शिक्षा विभाग में नौकरी पाने तक की पात्रता हासिल कर ली।
जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि उन्होंने कितनी बार मतदान किया और आधार कार्ड कैसे बनवाया।


