पटना, 21 अगस्त।बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने अगस्त माह के लिए पशुपालकों को खास सावधानियों और बचाव उपायों की जानकारी दी है। विभाग ने अपने पशुपालक कैलेंडर में खुरहा-मुंहपका (Foot and Mouth Disease – FMD) और गलाघोंटू (Haemorrhagic Septicaemia) जैसी संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।
अगस्त में खुरहा-मुंहपका रोग का खतरा
- एफएमडी एक अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है, जो गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सुअर में फैलता है।
- रोग के लक्षण: बुखार, मुंह और पैरों में छाले, लार बहना और लंगड़ापन।
- रोग से पशुओं की दूध उत्पादन और वजन पर असर पड़ता है।
- संक्रमण फैलता है: संक्रमित पशु, दूषित उपकरण, या हवा के माध्यम से।
- यह रोग मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा नहीं है।
विभाग की सलाह
- रोगग्रस्त पशुओं को अलग रखें और उनकी खान-पान की व्यवस्था अलग से करें।
- खुरहा-मुंहपका रोग वाले पशुओं का दूध उनके बछड़ों को न पिलाएं, ताकि संक्रमण न फैले।
- गलाघोंटू, जहरवात या अन्य रोग के लक्षण दिखते ही तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
- भेड़ और बकरी में PPR और भेड़ चेचक जैसी बीमारियों के लिए टीकाकरण अनिवार्य।
- खनिज मिश्रण 30-50 ग्राम प्रतिदिन दें, जिससे दूध उत्पादन और शारीरिक तंदुरुस्ती बनी रहे।
- पशुओं को अत्यधिक तापमान और तेज धूप से बचाने के उपाय करें।
रोकथाम और सुरक्षा
- टीकाकरण, स्वच्छता और जैव-सुरक्षा उपायों को अपनाना आवश्यक है।
- रोगी पशुओं से सीधे संपर्क से बचें और संक्रमित पशुओं के पास जाने से रोकें।
बिहार सरकार का उद्देश्य है कि अगस्त के इस माह में पशुपालक अपनी सावधानियों से पशुओं को रोगमुक्त और स्वस्थ बनाए रखें, जिससे पशुओं की उत्पादकता और किसान की आय दोनों सुरक्षित रहें।


