- अनुसंधान पदाधिकारियों को लैपटॉप व स्मार्टफोन उपलब्ध
- छापेमारी से स्थल निरीक्षण तक डिजिटल साक्ष्य अनिवार्य
पटना, 17 अगस्त: बिहार पुलिस अब अनुसंधान से लेकर जांच तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसके तहत अनुसंधान एवं जांच पदाधिकारियों सहित पुलिस बल के विभिन्न स्तरों पर तैनात अधिकारियों को लैपटॉप और स्मार्टफोन उपलब्ध कराए गए हैं। केवल थाना स्तर पर ही 40 हजार से अधिक पदाधिकारियों को डिजिटल उपकरण दिए जा चुके हैं।
पुलिस मुख्यालय ने रोजमर्रा की फाइलों और प्रक्रियाओं को ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने के लिए आईजी (आधुनिकीकरण) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों का अध्ययन कर चुकी है, जहां पुलिस व्यवस्था लगभग पूरी तरह डिजिटल हो चुकी है।
नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अब किसी भी पुलिस जांच या अनुसंधान प्रक्रिया में डिजिटल साक्ष्य प्रस्तुत करना अनिवार्य हो गया है। ऐसे में छापेमारी, कार्रवाई, स्थल निरीक्षण जैसी हर प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग कर उसे साक्ष्य के तौर पर अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा।
मोबाइल एप से जांच आसान
डिजिटाइजेशन को ध्यान में रखते हुए पुलिस विभाग ने कई मोबाइल आधारित एप विकसित कर उपयोग में लाए हैं। पासपोर्ट वेरिफिकेशन से लेकर अपराधियों की पहचान तक का कार्य अब इन एप्स के जरिये हो रहा है।
- सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम) से राज्य के 1300 में से 900 से अधिक थाने जुड़ चुके हैं।
- इस नेटवर्क से जुड़े थानों में सभी अपराधियों और कुख्यातों का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध है।
- बाकी थानों को जोड़ने की कवायद भी तेजी से चल रही है।
आपात सेवाएं भी डिजिटल
डायल-112 इमर्जेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम और साइबर सुरक्षा हेल्पलाइन-1930 पूरी तरह कंप्यूटरीकृत प्रणाली पर आधारित हैं। पुलिस की सीआईडी इकाई में भी फाइलों का आदान-प्रदान अब ऑनलाइन माध्यम से हो रहा है। जल्द ही पुलिस मुख्यालय से लेकर थाना स्तर तक फाइल मूवमेंट पूरी तरह डिजिटल कर दिया जाएगा।
अभी ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने की सुविधा है, लेकिन इसे सभी थानों में शुरू करने की तैयारी है। साथ ही सभी लाइसेंसी हथियारों और लाइसेंसधारकों का रिकॉर्ड भी डिजिटल कर दिया जाएगा, जिसे कभी भी ऑनलाइन देखा जा सकेगा।
डिजिटाइजेशन से होंगे बड़े फायदे
- सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।
- साक्ष्य से छेड़छाड़ की गुंजाइश नहीं रहेगी।
- किसी भी मामले की जांच अधिक प्रभावी और तेज़ होगी।
- दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया आसान होगी।
- लंबित मामलों की संख्या घटेगी।
डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि “पुलिस महकमा का पूर्ण डिजिटाइजेशन कार्य तेजी से चल रहा है। आने वाले कुछ महीनों में सभी कार्य ऑनलाइन माध्यम से होंगे, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनेगी।”


