किश्तवाड़, 15 अगस्त — जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में मचैल चंडी माता मंदिर जाने वाले मार्ग पर गुरुवार को बादल फटने से तबाही मच गई। चशोती गांव में दोपहर करीब 12:30 बजे हुए इस हादसे में अब तक 46 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 200 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसे में 120 से ज्यादा लोग घायल हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लगातार बारिश के बीच ऊपरी पहाड़ों पर बादल फटने से चशोती नाले में अचानक भारी बाढ़ आ गई। पानी अपने साथ मलबा, गाद और पत्थर लाते हुए घरों, वाहनों और लंगर स्थलों को बहा ले गया। 12 घर पूरी तरह ध्वस्त हो गए और कई आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं।
मचैल यात्रा का लंगर भी तबाह
चशोती में मचैल माता यात्रा के श्रद्धालुओं के लिए लगाया गया लंगर भी बर्बाद हो गया। यह लंगर उधमपुर के सैला तालाब क्षेत्र के लोगों द्वारा संचालित किया जा रहा था। हादसे के समय दोपहर का भोजन तैयार हो रहा था, और लंगर में सेवादार, रसोइए और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
स्थानीय लोग बने पहले रेस्क्यूर
सैलाब आने के तुरंत बाद मचैल यात्रियों को मोटरसाइकिल से ले जाने वाले स्थानीय चालक बचाव कार्य में कूद पड़े। उन्होंने घायलों को पांच किलोमीटर दूर हमोरी लंगर तक पहुंचाया, जहां लंगर संचालक और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी स्वयंसेवक बनकर प्राथमिक उपचार देने लगे।
राहत कार्य में कठिनाई
करीब ढाई घंटे बाद दो डॉक्टरों और पैरामेडिकल टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया, लेकिन पर्याप्त दवाएं और जरूरी उपकरण न होने के कारण बचाव में मुश्किलें आईं। हादसे के समय सुरक्षा जांच चौकी पर तैनात सेना, सीआईएसएफ और एसडीआरएफ के जवानों का भी कोई पता नहीं चल पा रहा है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि अगर लापता लोगों की संख्या सही साबित हुई, तो यह त्रासदी हाल के वर्षों में जम्मू-कश्मीर की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक हो सकती है।


