पटना | 14 अगस्त 2025: पटना एम्स में चयनित दो डॉक्टर — कुमार सिद्धार्थ और कुमार हर्षित राज — पर फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर चयन का आरोप लगा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दोनों के खिलाफ आईपीसी की धाराएं 420, 467, 468 और 471 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
सीबीआई के एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) में डिप्टी एसपी सुरेंद्र देपावत को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
शिकायत और प्रारंभिक जांच
दिसंबर 2024 में दानापुर के अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार ने सीबीआई में शिकायत दी थी, जिसमें आरोप था कि जून से सितंबर 2023 के बीच फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए एम्स में भर्ती हुई है।
प्रारंभिक जांच में पता चला कि कुमार सिद्धार्थ ने एसडीओ पटना सदर द्वारा जारी जाली ओबीसी नॉन-क्रीम लेयर प्रमाणपत्र का इस्तेमाल कर फिजियोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर का पद हासिल किया। आरोप यह भी है कि उनके चयन के लिए एसोसिएट प्रोफेसर का पद घटाकर असिस्टेंट प्रोफेसर कर दिया गया।
कुमार सिद्धार्थ, एम्स पटना के तत्कालीन रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष सह डीन डॉ. प्रेम कुमार के पुत्र हैं, जबकि कुमार हर्षित राज, तत्कालीन बाल शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. बिंदे कुमार के पुत्र हैं।


