उरी में आतंकियों से मुठभेड़ में रंगरा का वीर सपूत हवलदार अंकित कुमार यादव शहीद, पूरे भागलपुर में शोक की लहर

भागलपुर, 14 अगस्त 2025 | जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के उरी सेक्टर में बुधवार तड़के हुई मुठभेड़ में भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल के रंगरा प्रखंड स्थित चापर गांव के रहने वाले हवलदार अंकित कुमार यादव (33 वर्ष) मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। सेना ने आतंकियों की घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया, लेकिन इस दौरान अंकित कुमार ने अपनी जान की परवाह किए बिना देश की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

मुठभेड़ का घटनाक्रम

सेना के अधिकारियों के अनुसार, उरी सेक्टर के चुरंडा इलाके में तड़के करीब 3:30 बजे नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर संदिग्ध गतिविधियां देखी गईं। घुसपैठियों को रोकने के लिए भारतीय सेना ने तुरंत कार्रवाई की, जिसके बाद भीषण गोलीबारी हुई। खराब मौसम के बावजूद जवानों ने मोर्चा संभाले रखा। इसी दौरान हवलदार अंकित कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने अंतिम सांस ली।

श्रीनगर स्थित सेना की चिनार कोर ने ‘एक्स’ पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा—
“चिनार कोर मातृभूमि के वीर सपूत हवलदार अंकित कुमार के सर्वोच्च बलिदान को नमन करती है। उन्होंने ऑपरेशनल ड्यूटी निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।”

गांव में शोक और गर्व का माहौल

शहादत की खबर जैसे ही चापर गांव पहुंची, पूरे इलाके में मातम छा गया। लोग गम और गर्व के मिले-जुले भाव में डूब गए। हर घर से रोने की आवाजें आने लगीं, लेकिन साथ ही वीरता पर गर्व भी महसूस किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि अंकित बचपन से ही सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने का सपना देखते थे। 2012 में उन्होंने सेना जॉइन की और लगातार सीमा पर डटे रहे।

गांव के बुजुर्गों का कहना है—
“अंकित सिर्फ एक बहादुर सैनिक नहीं, बल्कि बेहद मिलनसार और मददगार इंसान भी थे। गांव में जब भी आते, सबसे मिलते और लोगों की मदद करते।”

परिवार का संघर्ष

अंकित के परिवार में पत्नी, दो बेटे उत्कर्ष (4) और उपांशु (2), माता-पिता, तीन बहनें और तीन भाई हैं। बड़े भाई निरंजन यादव सेना में, मिथिलेश यादव आरपीएफ में दरोगा और मुकेश यादव सेना में सेवारत हैं। पत्नी कटिहार में बच्चों के साथ रहती हैं, वहीं उनकी पढ़ाई चल रही है।

इस वक्त गांव बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। घर में पानी भरा है, जिससे अंतिम संस्कार की तैयारियों में भी कठिनाइयां आ रही हैं। बावजूद इसके प्रशासन और ग्रामीण मिलकर अंतिम विदाई की तैयारी कर रहे हैं।

अधूरा वादा और अंतिम मुलाकात

अंकित आखिरी बार मई में घर आए थे और दिवाली पर फिर आने का वादा करके ड्यूटी पर लौट गए थे। लेकिन किसे पता था कि अगली बार वे तिरंगे में लिपटे लौटेंगे। मां-पिता को अभी तक उनके शहीद होने की खबर नहीं दी गई है, ताकि वे अचानक सदमे में न आ जाएं।

अंतिम संस्कार की तैयारी

अंकित कुमार का पार्थिव शरीर सेना के विशेष विमान से पटना लाया जाएगा और वहां से सड़क मार्ग से गांव पहुंचाया जाएगा। पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। पूरे नवगछिया अनुमंडल और भागलपुर जिले से हजारों लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए जुटेंगे।

गांव के एक युवा ने कहा—
“हमारे अंकित भैया ने देश के लिए अपनी जान दी। वे हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगे। उनकी वीरता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।”


 

  • Related Posts

    बिहार में भूमि विवाद खत्म करने की बड़ी पहल, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने तय की डेडलाइन; दिसंबर 2027 तक पूरा होगा विशेष भूमि सर्वेक्षण

    Share Add as a preferred…

    Continue reading
    बिहार में पौधारोपण का नया रिकॉर्ड, एक साल में 40.68 लाख पौधे लगाए गए; हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि

    Share Add as a preferred…

    Continue reading