बिहार की मिंता देवी इन दिनों राजनीति के गलियारों में चर्चा का सबसे गर्म नाम बन गई हैं। वजह भी अनोखी है — चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट में उनकी उम्र 124 साल दर्ज कर दी गई है, जबकि हकीकत में वह सिर्फ 35 साल की हैं!
कैसे हुआ ‘उम्र का खेल’?
मिंता देवी, सीवान जिले के अरजानीपुर गांव की रहने वाली हैं और धनंजय सिंह की पत्नी हैं। उनके वोटर कार्ड में जन्मतिथि 1990 है, लेकिन वोटर लिस्ट में यह 1900 दर्ज कर दी गई, जिससे उनकी उम्र 124 साल दिख रही है।
- विधानसभा क्षेत्र: दरौंदा
- बूथ नंबर: 94
- वोटर लिस्ट में क्रम संख्या: 526
- मकान संख्या की जगह: पति का नाम लिख दिया गया
BLO पर गंभीर आरोप
मिंता देवी के ससुर तेजप्रताप सिंह का आरोप है कि
“BLO घर पर आए ही नहीं। उन्होंने गांव में किसी और के घर बैठकर फॉर्म भर दिया। हमें बुलाया तक नहीं गया। यही वजह है कि इतनी बड़ी गलती हो गई।”
उन्होंने बताया कि मिंता देवी और उनका पति छपरा में रहते हैं, जहां बेटा ऑटो चलाकर परिवार का भरण-पोषण करता है।
संसद में गूंजा मामला
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद दिल्ली में संसद के बाहर विपक्षी सांसदों ने मिंता देवी के नाम और फोटो वाली टी-शर्ट पहनकर प्रदर्शन किया।
प्रियंका गांधी वाड्रा, इंडिया ब्लॉक के सांसदों के साथ संसद के मकर द्वार पर पहुंचीं और कहा—
“राहुल गांधी ने पहले ही बताया था कि वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ी है। नाम, पता, सब फर्जी जोड़े गए हैं। मिंता देवी इसका जीता-जागता उदाहरण हैं।”
विपक्ष का आरोप — वोटर लिस्ट में ‘सिस्टमेटिक गड़बड़ी’
विपक्ष का दावा है कि मिंता देवी जैसी गड़बड़ियां सैकड़ों नहीं, हजारों हैं। अगर इतने बड़े पैमाने पर गलतियां हैं, तो यह साफ है कि वोटर लिस्ट का सही तरीके से सत्यापन नहीं हुआ है।
चुनाव आयोग की चुप्पी
इस पूरे मामले पर चुनाव आयोग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन मिंता देवी का मामला न सिर्फ सीवान में, बल्कि पूरे बिहार में ‘वोट चोरी’ के आरोपों की आग को और भड़का रहा है।


