भागलपुर – बाढ़ की तबाही ने इंसानों के साथ-साथ मवेशियों को भी गहरे संकट में डाल दिया है। राहत शिविरों में इंसानों से ज्यादा गाय, भैंस और बकरियां दिखाई दे रही हैं – ये वही मवेशी हैं जो गरीब परिवारों की सबसे बड़ी पूंजी और रोज़ी-रोटी का सहारा हैं।
लेकिन हालात यह हैं कि कई शिविरों में इन जानवरों के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था अब तक नहीं हो पाई है। भूख से व्याकुल गायों की मिमियाती आवाज़ें और भैंसों की सूनी आंखें मानो प्रशासन से गुहार लगा रही हों।
प्रशासन की सफाई और वादा
भागलपुर के एसडीएम ने बताया कि शिविरों में बाढ़ पीड़ितों के साथ उनके मवेशियों के लिए भी चारे की व्यवस्था की जा रही है।
“चाहे गाय हो, भैंस या बकरी – हम सभी के लिए चारे और दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं। साथ ही, पशुओं के इलाज और देखभाल के लिए विशेष स्वास्थ्य टीमें भी तैनात की गई हैं।”
जीविका पर खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि अगर मवेशियों को समय पर भोजन और इलाज नहीं मिला, तो यह उनके परिवारों की आजीविका पर सीधा असर डालेगा, क्योंकि बाढ़ के बाद इन्हीं जानवरों से उनकी जिंदगी दोबारा पटरी पर लौटती है।
फिलहाल, लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रशासन के वादे जल्द जमीनी हकीकत में बदलें और उनके मवेशियों को भी जीवनदान मिले।


