पटना | 10 अगस्त 2025 — बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा पर लगे दोहरे EPIC और उम्र में अंतर के आरोपों पर उन्होंने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक भूल है, फर्जीवाड़ा नहीं।
कैसे हुई गलती?
विजय सिन्हा ने बताया कि उनका परिवार पहले बांकीपुर, पटना की मतदाता सूची में दर्ज था।
अप्रैल 2024 में उन्होंने लखीसराय में नाम जोड़ने और बांकीपुर से नाम हटाने के लिए फॉर्म भरा। लेकिन तकनीकी कारणों से बांकीपुर से नाम नहीं हट पाया।
“5 अगस्त 2024 को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में गलती पकड़ में आने पर मैंने तुरंत BLO के जरिए नाम हटाने का आवेदन किया और उसकी रसीद भी मौजूद है।”
उम्र में तीन साल का फर्क क्यों?
तेजस्वी यादव के इस आरोप पर भी सिन्हा ने विस्तार से सफाई दी —
“यह महज़ डेटा एंट्री की गलती थी। उम्र प्रमाणपत्र के अनुसार सही है, और अप्रैल में ही ऑनलाइन सुधार का आवेदन किया गया था। चुनाव आयोग के नियम के मुताबिक एक महीने के भीतर इसे ठीक कर दिया जाएगा।”
राजनीतिक हमला और जवाब
सिन्हा ने आरोप लगाया कि यह पूरा विवाद एक सियासी चाल है,
“राजद नेता झूठ फैलाकर भ्रम पैदा करना चाहते हैं। यह जंगलराज की राजनीति है, जिसमें संवैधानिक पद का दुरुपयोग हो रहा है। भाजपा ऐसी संस्कृति में विश्वास नहीं करती।”
उन्होंने यह भी कहा कि उनका राजनीतिक और व्यक्तिगत रिकॉर्ड पारदर्शी है, और किसी भी जांच का वह सामना करने को तैयार हैं।
कानूनी स्थिति पर संकेत
विजय सिन्हा ने माना कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत दोहरे मतदाता पंजीकरण पर रोक है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि
“यह मामला धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि समय पर डेटा अपडेट न होने का है।”
अब निगाहें चुनाव आयोग पर
डिप्टी सीएम की सफाई के बाद अब यह देखना होगा कि चुनाव आयोग उनके आवेदन को कब तक प्रोसेस करता है और तकनीकी त्रुटि के इस मामले को किस तरह निपटाता है।


