
- RSS से लेकर डिपो लाइन तक हुआ हाई-टेक विद्युत निरीक्षण
- राजधानीवासी जल्द चढ़ेंगे मेट्रो की रफ्तार पर
पटना, 08 अगस्त।राजधानी पटना में मेट्रो सफर का सपना अब तेज रफ्तार से सच होने जा रहा है। पटना मेट्रो परियोजना में शुक्रवार को एक अहम पड़ाव पार हो गया, जब मुख्य विद्युत निरीक्षक जनरल (CEIG) भारत सरकार, जगदीश कुमार ने मेट्रो के प्रमुख विद्युत प्रतिष्ठानों का विस्तृत और तकनीकी स्तर पर गहन निरीक्षण किया।
यह निरीक्षण न केवल परियोजना की स्पीड बढ़ाने वाला साबित हुआ, बल्कि इससे यह भी साफ हो गया कि मेट्रो के हर पहलू में सुरक्षा और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कहां-कहां हुआ निरीक्षण
CEIG की टीम ने पटना मेट्रो के कई अहम पॉइंट्स पर जाकर विद्युत ढांचे की सेहत का जायजा लिया, जिनमें शामिल हैं—
- रिसीविंग सब स्टेशन (RSS)
- ऑक्ज़िलरी सब स्टेशन (ASS)
- फीडर लाइन
- डिपो लाइन
- और अन्य ऑन-साइट हाई वोल्टेज कनेक्शन
इस मौके पर पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (PMRCL) और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के सीनियर अफसर भी मौजूद रहे। हर मशीन, वायर, पैनल और कनेक्शन का लोड टेस्ट, वोल्टेज चेक और सेफ्टी इंस्पेक्शन किया गया, ताकि ट्रायल रन से पहले किसी भी खामी की गुंजाइश न रहे।
सुरक्षा ही पहली प्राथमिकता
PMRCL के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ कहा—
“हर लाइन जो हम बिछाते हैं, उसमें सुरक्षा पहले आती है।
हम चाहते हैं कि जब मेट्रो पटना की पटरियों पर दौड़े, तो यात्री निश्चिंत होकर सफर करें।”
यही वजह है कि मेट्रो के ऑपरेशन से पहले हर स्टेप को इंटरनेशनल सेफ्टी स्टैंडर्ड पर जांचा जा रहा है।
अगला पड़ाव – ट्रायल रन
विद्युत निरीक्षण के पूरा होते ही अब प्रोजेक्ट का अगला चरण शुरू होगा – परीक्षण संचालन (ट्रायल रन)।
इसमें मेट्रो ट्रेन को पटरी पर उतारकर उसकी स्पीड, ब्रेकिंग सिस्टम, सिग्नलिंग और पावर कंजंप्शन जैसी तकनीकी चीज़ों की रियल-टाइम टेस्टिंग होगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह ट्रायल रन यात्रियों के भरोसे को और मजबूत करेगा और परियोजना की लॉन्चिंग डेट को भी करीब लाएगा।
पटना मेट्रो – एक नजर में
- फेज-1 में दो कॉरिडोर
- लंबाई – करीब 32 किलोमीटर
- स्टेशनों की संख्या – 24
- कनेक्टिविटी – एयरपोर्ट से लेकर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड तक
- अपेक्षित लॉन्च – निरीक्षण और ट्रायल रन के बाद जल्द
पटना के लोग अब बस उसी दिन का इंतजार कर रहे हैं, जब मेट्रो के दरवाजे खुलें और सफर की नई रफ्तार शुरू हो जाए।
अगर सब कुछ तय समय पर चला, तो कुछ ही महीनों में राजधानी की सड़कों का जाम इतिहास बन जाएगा और पटना मेट्रो शहर के लिए नई लाइफलाइन साबित होगी।


