2285 मासूमों को मिला जीवनदान!बिहार की ‘मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना’ बनी नन्हे दिलों की जीवनरेखा

पटना, 7 अगस्त।जब एक माँ की गोद में उसका बच्चा बार-बार नीला पड़ने लगे… जब सांसें तेज हों, जब दूध पीते-पीते थक कर सो जाए… तो परिवार टूटने लगता है। लेकिन ऐसे हजारों टूटते परिवारों को नई उम्मीद दी है मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना ने। बिहार सरकार की इस सराहनीय पहल ने बीते चार वर्षों में 2,285 नन्हे दिलों की धड़कनें फिर से चालू कर दी हैं — वह भी बिल्कुल मुफ्त।

दिल जीतने वाली सर्जरी

इस योजना के तहत अब तक 1,543 बच्चों की सर्जरी अहमदाबाद के प्रसिद्ध श्री सत्य साईं हार्ट हॉस्पिटल में कराई गई। इतना ही नहीं, 742 बच्चों का सफल ऑपरेशन पटना के तीन प्रतिष्ठित अस्पतालों — जयप्रभा मेदांता, आईजीआईएमएस और आईजीआईसी — में किया गया।

यह कोई सामान्य आंकड़ा नहीं है, यह 2,285 परिवारों की खुशियां हैं, जिन्हें सरकार ने टूटने से बचाया।

कैसे मिले इस योजना का लाभ?

सरकार ने प्रक्रिया को बेहद आसान बनाया है। योजना का लाभ पाने के लिए माता-पिता को केवल ये दस्तावेज़ जुटाने होंगे:

  • बच्चे का आधार कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र
  • बच्चे की दो पासपोर्ट साइज फोटो
  • माता-पिता का बिहार का निवासी होना अनिवार्य

बस! इसके बाद बच्चे का रजिस्ट्रेशन हो जाएगा और ज़रूरत होने पर उसे इलाज के लिए भेजा जाएगा — कोई फीस नहीं, कोई दलाल नहीं, सब कुछ पारदर्शी।

बचपन की मुस्कान छिन रही हो तो सतर्क हो जाइए

अगर आपके बच्चे में ये लक्षण दिखें, तो समय गंवाना खतरनाक हो सकता है:

  • बार-बार और जल्दी थक जाना
  • दूध पीने में कठिनाई
  • सांस फूलना या सीने में धड़कनों का तेज होना
  • होठों, जीभ या शरीर का नीला पड़ना
  • शरीर का वजन न बढ़ना
  • पैरों, पेट या आंखों के आसपास सूजन

ये सब जन्मजात हृदय रोग के संकेत हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) या जिला स्वास्थ्य समिति पहुंचिए और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के जिला समन्वयक से संपर्क कीजिए।

दिल से कहिए – यह योजना है कमाल की!

कई बार सरकार की योजनाएं सिर्फ कागज़ों में चलती हैं, लेकिन मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना जमीनी हकीकत है, जो अब तक हजारों मासूमों की जिंदगी संवार चुकी है। बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों के बीच यह योजना एक उम्मीद की किरण बनकर उभरी है।


आपके पास ऐसा कोई बच्चा है जिसे मदद की जरूरत है? तो यह खबर सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, आगे बढ़ाने के लिए है।
क्योंकि एक मासूम की धड़कनें सिर्फ उसके परिवार की नहीं, इस समाज की भी ज़िम्मेदारी हैं।


 

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