मुंगेर। बिहार के मुंगेर जिले में एक चौंकाने वाला बैंकिंग फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने न सिर्फ सिस्टम की खामियों को उजागर किया है बल्कि आम नागरिकों की निजता और दस्तावेजों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। एक पंजीकृत ठेकेदार के आधार और पैन कार्ड की नकल कर एक निजी वित्तीय कंपनी ने किसी दूसरे व्यक्ति को 8 करोड़ 35 लाख रुपये का लोन जारी कर दिया।
ठेकेदार को तब लगी भनक जब…
यह मामला तब सामने आया जब मुंगेर कोतवाली थाना अंतर्गत लाल दरवाजा गीता बाबू रोड निवासी संवेदक संजीव कुमार उर्फ निक्कू सिंह ने इंडियन बैंक, नीलम चौक ब्रांच में 7 करोड़ 52 लाख 71 हजार रुपये की बैंक गारंटी के लिए आवेदन दिया। बैंक ने जब उनकी सिविल रिपोर्ट (CIBIL) निकाली, तो रिपोर्ट में उन्हें 8 करोड़ 35 लाख 34 हजार 174 रुपये का लोन डिफाल्टर दिखा दिया गया।
जांच में खुला फर्जीवाड़े का राज
संजीव कुमार ने कोतवाली थाना में लिखित शिकायत देकर बताया कि उन्होंने कभी किसी निजी फाइनेंस कंपनी से लोन नहीं लिया, न ही ऐसी किसी प्रक्रिया में शामिल हुए। रिपोर्ट के अनुसार यह लोन उनके आधार कार्ड और पैन कार्ड के जरिए किसी और व्यक्ति के नाम पर जारी किया गया।
पीड़ित ठेकेदार का कहना है कि यह उनके साथ सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी है, जिसमें किसी ने उनकी व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग कर करोड़ों का लोन ले लिया और अब इसका बोझ उनके कंधों पर डाला जा रहा है।
अब तक पुलिस जांच शुरू, लेकिन कई सवाल खड़े
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि निजी फाइनेंस कंपनी ने दस्तावेजों की वैधता की पूरी जांच किए बिना ही इतनी बड़ी रकम लोन के रूप में जारी कर दी।
अब सवाल उठता है—
- क्या कंपनी को दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया का पालन करना जरूरी नहीं था?
- कैसे एक व्यक्ति के दस्तावेज से दूसरे को करोड़ों का लोन दिया जा सकता है?
- क्या इसमें फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों की भी मिलीभगत है?
बैंकिंग सिस्टम की बड़ी चूक या सुनियोजित साजिश?
इस प्रकरण ने साफ कर दिया है कि आधार और पैन कार्ड जैसे दस्तावेजों की सुरक्षा अब खतरे में है। डिजिटल युग में जहां आधार को हर जगह पहचान के रूप में अनिवार्य किया गया है, वहीं यदि इसकी सत्यता की पुष्टि किए बिना किसी के नाम पर लोन जारी होने लगे, तो यह आम आदमी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
संजीव कुमार अब अपने ऊपर लगे डिफाल्टर टैग को हटवाने और न्याय की मांग को लेकर प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं। वहीं पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामला बेहद संवेदनशील है और साइबर क्राइम एंगल से भी जांच की जा रही है।
यह घटना न सिर्फ मुंगेर, बल्कि पूरे राज्य के लिए एक चेतावनी है कि किसी के दस्तावेज का दुरुपयोग कर करोड़ों की ठगी की जा सकती है—और व्यक्ति को पता भी नहीं चलता।


