
भागलपुर। सैंडिस कंपाउंड, जो अब तक आम लोगों के सुकून और राहत का ठिकाना रहा है, अब वसूली का नया अड्डा बनने जा रहा है। स्मार्ट सिटी लिमिटेड के फैसले के अनुसार, अब इस ऐतिहासिक स्थल में सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक प्रवेश के लिए 5 वर्ष से ऊपर के हर व्यक्ति को 10 रुपये का शुल्क चुकाना होगा। यही नहीं, पार्क के अंदर की तमाम सुविधाएं अब पैसे देकर ही मिलेंगी।
शहर के दिल की धड़कन कहे जाने वाले इस कंपाउंड पर अब बकायदा टेंडर हुआ है और 66 लाख रुपये की सर्वाधिक बोली लगाने वाली एक निजी एजेंसी को इसका संचालन और रखरखाव सौंप दिया गया है। एजेंसी को तीन वर्षों तक सैंडिस कंपाउंड और मायागंज स्थित नाइट शेल्टर का संचालन और मेंटेनेंस करना होगा।
“शुल्क हटे, नहीं तो कार्रवाई झेलो!” – सांसद अजय मंडल का अल्टीमेटम
जैसे ही इस फैसले की खबर आम लोगों तक पहुंची, विरोध की लहर दौड़ गई। सबसे तीखा रुख अपनाया सांसद अजय मंडल ने, जिन्होंने साफ शब्दों में चेताया –
“स्मार्ट सिटी कंपनी को मेरा अल्टीमेटम है, अविलंब शुल्क हटे। यह जनविरोधी निर्णय है, जिसे किसी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
सांसद ने जिला प्रशासन को भी जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इस निर्णय की समीक्षा वह स्वयं करेंगे और आवश्यकतानुसार सड़क से सदन तक संघर्ष करेंगे।
सैंडिस की खस्ताहाली, अब जनता की जेब पर मार
विडंबना यह है कि जिन सुविधाओं के नाम पर शुल्क वसूला जा रहा है, वे पिछले सात महीनों से बंद पड़ी हैं। टूटे झूले, जर्जर वॉकवे, खराब स्ट्रीट लाइट, गिरे हुए पेड़, क्लीवलैंड मेमोरियल में टूटी बेंचें, झाड़ी में तब्दील हुए गार्डन – यह है वर्तमान सैंडिस की तस्वीर।
अब नई एजेंसी को 75 से अधिक स्टाफ रखने होंगे जिसमें कोच, स्वीपर, टेक्नीशियन, माली, कंपाउंडर तक शामिल हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या वाकई यह व्यवस्था बहाल हो पाएगी, या केवल फीस वसूली का खेल चलेगा?
“सैंडिस हमारा है, ये वसूली नहीं चलेगी” – जन संगठनों की हुंकार
शहर के तमाम सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और नागरिकों ने इस निर्णय को तानाशाही बताया है।
सैंडिस कंपाउंड विकास समिति के अमरनाथ गोयनका ने कहा –
“यह गलत निर्णय है, हम कोर्ट तक जाएंगे।”
आईएमए अध्यक्ष डॉ. रेखा झा ने भी विरोध जताते हुए कहा –
“सैंडिस में एंट्री पर शुल्क नहीं होना चाहिए। हां, गंदगी फैलाने वालों से जुर्माना लिया जाए।”
प्रिया सोनी, जो सैंडिस में एरोबिक क्लास चलाती हैं, बोलीं –
“यह फैसला आम जनता के खिलाफ है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।”
ये फीसें चुभेंगी जेब में : शुल्क की लिस्ट देखिए और सोचिए
- प्रवेश शुल्क (सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे):
- 5 साल से ऊपर: 10 रुपये
- विशेष अवसर (न्यू ईयर आदि): 20 रुपये
- किड्स प्ले एरिया: प्रति बच्चा/अभिभावक – 10 रुपये
- डीएसएलआर कैमरा: 150 रुपये
- वीडियो शूटिंग: 2000 रुपये
- पार्किंग शुल्क:
- साइकिल: 5 रुपये (प्रति दो घंटे)
- दोपहिया: 20 रुपये
- चारपहिया: 30 रुपये
- ओपन एयर थिएटर बुकिंग: 10,000 से 25,000 रुपये
- क्लब व खेल सुविधाएं (जिम, स्वीमिंग पूल, बैडमिंटन, टेनिस, आदि):
- रजिस्ट्रेशन, ट्रायल, मासिक, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और वार्षिक शुल्क के अलग-अलग स्लैब तय किए गए हैं।
टिकट काउंटर तैयार, पर जनता तैयार नहीं
स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने परिसर में टिकट काउंटर बनवा दिए हैं। लेकिन जनता का सवाल है –
“क्या हवा में सांस लेना भी अब टैक्सेबल हो गया?”
कई युवा जो पीटी की तैयारी करते हैं, बुजुर्ग जो नियमित टहलने आते हैं, बच्चों की माएं जो अपने बच्चों को झूला झुलाने लाती हैं – सबका एक ही सवाल है –
“हम टैक्स देते हैं, फिर इस पर अतिरिक्त बोझ क्यों?”
वर्तमान एजेंसी से पहले दुरुस्त कराएंगे हालात – स्मार्ट सिटी लिमिटेड
स्मार्ट सिटी लिमिटेड के पीआरओ पंकज कुमार ने कहा कि पहले से कार्यरत मेंटेनेंस एजेंसी से सभी खामियों को ठीक कराया जाएगा, फिर नई एजेंसी को यह हैंडओवर किया जाएगा।
वहीं नगर आयुक्त शुभम कुमार और सीजीएम संदीप कुमार ने कहा कि मॉर्निंग वॉकर्स की सुविधा के लिए शुल्क का समय सुबह 9 बजे से करने पर विचार हो रहा है।
फिलहाल जनता के मूड में उबाल
साफ है, शहर में गुस्सा है, नाराजगी है, और संघर्ष की तैयारी है।
भागलपुर के लोगों के लिए सैंडिस सिर्फ एक मैदान नहीं, जीवनशैली का हिस्सा है। और जब उस पर शुल्क लगाया गया है, तो अब जनता भी मैदान में उतरने को तैयार है।


